BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi : कॉर्पोरेट और जॉब मार्केट में नौकरी पाने के पारंपरिक तौर-तरीकों में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एक हालिया और चौंकाने वाली रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, आजकल कंपनियों में इस्तेमाल होने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ‘एप्लीकेंट ट्रैकिंग सिस्टम’ (ATS) इंसानों द्वारा लिखे गए बायोडाटा के मुकाबले AI से तैयार किए गए रिज्यूमे (Resume) को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इस नए ट्रेंड ने नौकरी के चयन की पूरी प्रक्रिया पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

New Delhi कैसे हुआ खुलासा? 24 तरह की नौकरियों पर हुआ टेस्ट
इस व्यापक शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया में AI के व्यवहार को समझने के लिए एक बड़ा एक्सपेरिमेंट किया:
- विशाल डेटा पर रिसर्च: अध्ययन के लिए इंसानों द्वारा लिखे गए कुल 2,245 रिज्यूमे का बारीकी से विश्लेषण किया गया। इसके बाद, उन्हीं रिज्यूमे के कई अलग-अलग AI वर्जन्स (संस्करण) तैयार किए गए।
- व्यापक टेस्टिंग: इन सभी इंसानी और AI जनरेटेड रिज्यूमे को 24 अलग-अलग सेक्टर्स की नौकरियों के लिए ऑटोमेटेड रिक्रूटमेंट सिस्टम में डाला गया।
- शैली का प्रभाव: नतीजों में पाया गया कि AI शॉर्टलिस्टिंग सिस्टम रिज्यूमे की खास भाषाई बनावट, कीवर्ड्स और स्टाइल के आधार पर फैसला ले रहा था।
New Delhi चौंकाने वाले नतीजे: AI रिज्यूमे को 23% से 60% तक का फायदा
जब इंसानी और मशीनी रिज्यूमे की तुलना की गई, तो जो आंकड़े सामने आए वे नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को हैरान करने वाले हैं:

| मुख्य बिंदु | रिसर्च के निष्कर्ष |
| चयन की संभावना | AI आधारित चेकिंग सिस्टम ने इंसानी रिज्यूमे के मुकाबले AI से लिखे गए रिज्यूमे को 23% से लेकर 60% तक अधिक प्राथमिकता दी। |
| सबसे प्रभावित सेक्टर्स | यह ट्रेंड सबसे ज्यादा अकाउंटिंग (Accounting), सेल्स (Sales) और फाइनेंस (Finance) जैसे क्षेत्रों में देखा गया, जहां रिज्यूमे के फॉर्मेट और खास प्रोफेशनल शब्दावली (Keywords) का महत्व अधिक होता है। |
New Delhi विशेषज्ञों की चेतावनी: बढ़ सकता है एक ‘नया पक्षपात’ (AI Bias)
इस नए ट्रेंड ने मानव संसाधन (HR) विशेषज्ञों और तकनीकी विचारकों की चिंता बढ़ा दी है।
योग्य उम्मीदवार हो सकते हैं बाहर: विशेषज्ञों का मानना है कि AI टूल्स द्वारा लिखे गए रिज्यूमे पूरी तरह से मशीनी एल्गोरिदम के अनुकूल (ATS-friendly) होते हैं। ऐसे में यह स्थिति भर्ती प्रक्रिया में एक नए प्रकार का ‘डिजिटल पक्षपात’ पैदा कर सकती है, जिससे वास्तव में योग्य और हुनरमंद उम्मीदवार सिर्फ इसलिए रिजेक्ट हो सकते हैं क्योंकि उनका रिज्यूमे किसी मशीन ने नहीं लिखा था।
New Delhi इस रिपोर्ट में साफ तौर पर आगाह किया गया है कि यदि इस तकनीकी असंतुलन को समय रहते सुधारा या नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में केवल कॉर्पोरेट नौकरियां ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा, स्कॉलरशिप और अन्य महत्वपूर्ण प्रोफेशनल क्षेत्रों में भी चयन की पारदर्शिता पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।
Read this: Khushi Kapoor और वेदांग रैना का हुआ ब्रेकअप? अभिनेता के बयान ने तेज की चर्चाएं





