BY
Yoganand Shrivastava
Delhi दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई हाई कोर्ट की न्यायाधीश स्वर्ण कांत शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित तौर पर अपमानजनक और भ्रामक पोस्ट करने के मामले में की गई है।

Delhi जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच ने की सुनवाई
इस मामले की सुनवाई मंगलवार, 19 मई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ (बेंच) में हुई। अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और दुर्गेश पाठक सहित अन्य नेताओं से उनके द्वारा किए गए सोशल मीडिया पोस्ट पर उनका पक्ष मांगा है। अदालत ने सभी नेताओं को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है, और मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 को तय की है।

Delhi न्यायाधीश स्वर्ण कांत शर्मा ने खुद लिया था स्वतः संज्ञान (Suo Motu)
दरअसल, यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब आबकारी नीति (Excise Policy) से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने 14 मई को इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया था। उन्होंने सख्त लहजे में कहा था कि कानूनी विकल्पों को अपनाने के बजाय सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ एक ‘सोचा-समझा और सुनियोजित बदनामी का अभियान’ चलाया गया। इस विवाद के बाद उन्होंने स्पष्ट किया था कि आरोपियों को बरी करने के खिलाफ सीबीआई (CBI) की याचिका पर अब कोई दूसरी बेंच सुनवाई करेगी।

Delhi ‘एडिटेड वीडियो’ और राजनीतिक निष्ठा के आरोपों पर आपत्ति
जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने ‘आप’ नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए कई पोस्टों पर गंभीर आपत्ति जताई थी। इन पोस्टों में न्यायाधीश पर “राजनीतिक निष्ठा” रखने के आरोप लगाए गए थे। इसके अलावा, वाराणसी के एक शिक्षण संस्थान में उनके द्वारा दिए गए एक भाषण की वीडियो क्लिप को कथित तौर पर गलत तरीके से “एडिट (तोड़-मरोड़) कर” सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया था, जिसे अदालत ने न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने का प्रयास माना है।





