Khabar zara hatke: दुनिया के रेगिस्तानी इलाकों में पाए जाने वाले ऊंट अब चिकित्सा विज्ञान में नई उम्मीद बनकर सामने आ रहे हैं। अब तक ऊंट के दूध को सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता था, लेकिन हालिया वैज्ञानिक रिसर्च में दावा किया गया है कि ऊंट के आंसुओं में मौजूद खास एंटीबॉडीज कई जहरीले सांपों के जहर को निष्क्रिय करने की क्षमता रखती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यह खोज एंटीवेनम तकनीक में बड़ा बदलाव ला सकती है।
Khabar zara hatke: भारत और दुबई के वैज्ञानिकों ने किया संयुक्त अध्ययन
इस रिसर्च को दुबई की सेंट्रल वेटरनरी रिसर्च लेबोरेटरी (CVRL) और भारत के बीकानेर स्थित नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन कैमल (NRCC) के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है। अध्ययन के दौरान ऊंटों को नियंत्रित मात्रा में जहरीले सांप सॉ-स्केल्ड वाइपर के विष से इम्यूनाइज किया गया।
इसके बाद वैज्ञानिकों ने ऊंटों के खून और आंसुओं के नमूने लेकर उनका परीक्षण किया। लैब जांच में पाया गया कि आंसुओं में मौजूद विशेष नैनोबॉडीज सांप के जहर से होने वाले गंभीर प्रभावों को कम करने में सक्षम हो सकती हैं।
Khabar zara hatke: 26 तरह के सांपों के जहर पर असर का दावा
रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार ऊंट के आंसुओं में मौजूद नैनोबॉडीज कई खतरनाक सांपों के विष पर प्रभाव डाल सकती हैं। इनमें कोबरा, करैत और वाइपर जैसी जहरीली प्रजातियां शामिल हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि ये एंटीबॉडीज शरीर में फैलने वाले न्यूरोटॉक्सिन, आंतरिक रक्तस्राव और ब्लड क्लॉटिंग जैसी समस्याओं को रोकने में मदद कर सकती हैं।
Khabar zara hatke: पारंपरिक एंटीवेनम से कैसे अलग हैं ये नैनोबॉडीज
सामान्य एंटीवेनम अक्सर घोड़े या भेड़ से तैयार किए जाते हैं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए ठंडे तापमान की जरूरत होती है और कई बार मरीजों में एलर्जी जैसी दिक्कतें भी देखने को मिलती हैं।
इसके मुकाबले ऊंट से मिलने वाली कैमेलिड एंटीबॉडीज आकार में छोटी, ज्यादा स्थिर और गर्मी सहन करने वाली बताई जा रही हैं। यही वजह है कि इन्हें दूरदराज और गर्म इलाकों में उपयोगी माना जा रहा है।
Khabar zara hatke: भारत जैसे देशों के लिए हो सकती है बड़ी राहत
भारत में हर साल हजारों लोग सांप के काटने का शिकार होते हैं। ग्रामीण इलाकों में समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मौतों का आंकड़ा भी अधिक रहता है। ऐसे में यदि ऊंट आधारित एंटीवेनम तकनीक सफल होती है, तो यह कम लागत और आसान उपलब्धता वाला विकल्प बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
Khabar zara hatke: आंसुओं में मौजूद तत्व संक्रमण से लड़ने में भी मददगार
रिसर्च के मुताबिक ऊंट के आंसुओं में प्रोटीन, एंजाइम और लाइसोजाइम जैसे कई जैविक तत्व पाए जाते हैं। ये शरीर में संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकते हैं।
जब ऊंट को जहर की नियंत्रित मात्रा दी जाती है, तब उसका शरीर एंटीबॉडीज तैयार करता है। यही एंटीबॉडीज आंसुओं तक पहुंचती हैं और विषैले टॉक्सिन्स को निष्क्रिय करने में मदद कर सकती हैं।
Khabar zara hatke: ऊंट पालकों को भी मिल सकता है फायदा
यदि यह तकनीक भविष्य में व्यावसायिक रूप से सफल होती है, तो राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में ऊंट पालन करने वाले लोगों को भी आर्थिक लाभ मिल सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे ऊंट आधारित बायोटेक्नोलॉजी और पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा।
Khabar zara hatke: अभी शुरुआती चरण में है रिसर्च
हालांकि वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह रिसर्च अभी प्रारंभिक चरण में है। कुछ फैक्ट चेक रिपोर्ट्स में भी बताया गया है कि फिलहाल इसे पूरी तरह प्रमाणित चिकित्सा तकनीक नहीं माना जा सकता।
विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीधे ऊंट के आंसुओं का इस्तेमाल इलाज के रूप में नहीं किया जाएगा। इसके बजाय आंसुओं से विशेष एंटीबॉडीज निकालकर दवा तैयार करने की प्रक्रिया विकसित की जाएगी।





