Report: Avinash shrivastva
Sasaram पटना में शिक्षक बहाली (TRE-4) की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर हुए पुलिसिया बल प्रयोग के बाद अब बिहार की राजनीति गरमा गई है। इसी कड़ी में रोहतास के सासाराम में भाकपा माले के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर नीतीश-सम्राट सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के रवैये को “दमनकारी” बताते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन किया।
Sasaram काराकाट विधायक का तीखा हमला: “लोकतंत्र में तानाशाही बर्दाश्त नहीं”
इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे काराकाट विधायक अरुण कुमार सिंह ने सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सरकार लाठी के दम पर युवाओं की आवाज दबाना चाहती है। विधायक ने पटना में हुई कार्रवाई को लोकतंत्र के लिए काला अध्याय करार दिया और कहा कि छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार निंदनीय है।
Sasaram गिरफ्तारी और माफी की मांग: माले ने रखा अपना रुख
प्रदर्शन के दौरान भाकपा माले ने स्पष्ट किया कि वे इस लड़ाई में अभ्यर्थियों के साथ खड़े हैं। विधायक अरुण कुमार सिंह ने सरकार के सामने प्रमुखता से तीन मांगें रखीं:
- प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी अभ्यर्थियों को अविलंब बिना शर्त रिहा किया जाए।
- निर्दोष छात्रों पर बल प्रयोग के लिए सरकार सार्वजनिक रूप से माफी मांगे।
- बिना किसी देरी के TRE-4 का आधिकारिक विज्ञापन जारी कर बहाली सुनिश्चित की जाए।
Sasaram राजनीतिक तपिश बढ़ी: सरकार के लिए बढ़ी मुश्किलें
सासाराम में हुआ यह प्रदर्शन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले युवाओं और विपक्षी दलों के एकजुट होने का संकेत भी है। माले कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में और उग्र रूप लेगा। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस बढ़ते दबाव के बीच विज्ञापन और गिरफ्तारियों को लेकर क्या रुख अपनाती है।





