BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi युद्धों का जिक्र आते ही हमारे दिमाग में सालों तक चलने वाले संघर्षों की तस्वीर उभरती है। वर्तमान में रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व का तनाव इसके उदाहरण हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इतिहास में एक ऐसी जंग भी हुई थी जो शुरू होने के एक घंटे के भीतर ही खत्म हो गई थी? इसे ‘एंग्लो-जांजीबार युद्ध’ कहा जाता है, जो केवल 45 मिनट तक चला था।

New Delhi क्यों शुरू हुई थी यह जंग?
यह ऐतिहासिक घटना 27 अगस्त, 1896 की है। यह संघर्ष ब्रिटिश साम्राज्य और अफ्रीकी द्वीप समूह ‘जांजीबार’ की सल्तनत के बीच हुआ था। विवाद की मुख्य वजह ‘उत्तराधिकार’ थी। ब्रिटिश समर्थक सुल्तान हमद बिन थुवैनी की मृत्यु के बाद उनके भतीजे खालिद बिन बरघाश ने सत्ता हथिया ली थी। ब्रिटिश शासन को यह मंजूर नहीं था क्योंकि बरघाश ने उनकी अनुमति के बिना खुद को सुल्तान घोषित कर दिया था।

New Delhi 9 बजे का अल्टीमेटम और 9:02 पर पहली गोली
ब्रिटिश सेना ने खालिद बिन बरघाश को महल खाली करने और पद छोड़ने के लिए सुबह 9 बजे तक का अल्टीमेटम दिया। जब सुल्तान ने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया, तो बंदरगाह पर खड़े ब्रिटिश युद्धपोतों ने ठीक सुबह 9:02 बजे सुल्तान के महल पर भीषण गोलाबारी शुरू कर दी।

New Delhi एकतरफा मुकाबले में हुई भारी तबाही
यह जंग पूरी तरह से एकतरफा थी। जांजीबार की छोटी सी सेना आधुनिक ब्रिटिश तोपों और युद्धपोतों का मुकाबला नहीं कर सकी। इस संक्षिप्त मुठभेड़ में निम्नलिखित परिणाम सामने आए:
- नुकसान: सुल्तान के महल और उनकी एकमात्र शाही नौका ‘एचएचएस ग्लासगो’ को पूरी तरह तबाह कर दिया गया।
- हताहत: जांजीबार की ओर से करीब 500 लोग मारे गए या घायल हुए।
- ब्रिटिश पक्ष: ब्रिटिश सेना का केवल एक नाविक घायल हुआ था।
New Delhi 9:45 पर लहराया गया सफेद झंडा
सुबह 9:40 से 9:45 के बीच सुल्तान के महल से झंडा नीचे उतार दिया गया, जिसका अर्थ था समर्पण। इस तरह आधिकारिक तौर पर यह युद्ध महज 45 मिनट के भीतर समाप्त हो गया। खालिद बिन बरघाश महल छोड़कर भाग गए और अंग्रेजों ने अपनी पसंद के सुल्तान हमुद बिन मुहम्मद को सत्ता पर बैठा दिया।
आज भी गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इसे ‘दुनिया के सबसे छोटे युद्ध’ के रूप में दर्ज किया गया है।





