Gangaur 2026: गणगौर का पर्व महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं और विधि-विधान से पूजा करती हैं। यह उत्सव लगभग 18 दिनों तक चलता है, लेकिन इसका सबसे महत्वपूर्ण दिन चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन माना जाता है। इस वर्ष यह पर्व 21 मार्च 2026 को मनाया जाएगा, जिसे बड़ी गणगौर भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं बालू या मिट्टी से शिव-पार्वती (ईसर-गौरा) की प्रतिमा बनाकर उनका श्रृंगार करती हैं और पारंपरिक गीत गाते हुए पूजा करती हैं।
Gangaur 2026: गणगौर पूजा तिथि और शुभ मुहूर्त
तृतीया तिथि की शुरुआत 20 मार्च को रात 2:30 बजे से होगी और इसका समापन 21 मार्च को रात 11:56 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार 21 मार्च को ही गणगौर मनाई जाएगी। पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:49 से 5:36 तक और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:52 तक शुभ माना गया है।
Gangaur 2026: गणगौर पूजा सामग्री
गणगौर पूजा के लिए लकड़ी की चौकी, तांबे का कलश, गणगौर माता की प्रतिमा, मिट्टी के बर्तन और दीये, कुमकुम, चावल, फूल, हल्दी, मेहंदी, गुलाल, अबीर, मिठाई, घी, नारियल, आम के पत्ते, पान, पानी का पात्र और पूजा थाली जैसी चीजें जरूरी होती हैं। इसके अलावा सौभाग्य सामग्री जैसे चुनरी, काजल, लाल या पीला कपड़ा, गेहूं, मूंग और अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी चढ़ाई जाती हैं। पूजा के दौरान इन सभी सामग्रियों का उपयोग कर माता गौरा और भगवान शिव की विधिपूर्वक आराधना की जाती है।
Gangaur 2026: देवी पार्वती की विशेष पूजा का महत्व
इस दिन देवी पार्वती की पूजा विशेष रूप से की जाती है, क्योंकि तृतीया तिथि उनकी ही मानी जाती है। महिलाएं उन्हें सोलह श्रृंगार अर्पित करती हैं और कुमकुम, हल्दी, मेहंदी जैसी सुहाग सामग्री चढ़ाती हैं। मान्यता है कि इससे वैवाहिक जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहती है।
Gangaur 2026: गणगौर में ‘गुने’ बनाने की परंपरा
गणगौर के दिन महिलाएं आटे, मैदा या बेसन में हल्दी मिलाकर छोटे-छोटे आभूषण जैसे आकार बनाती हैं, जिन्हें ‘गुने’ कहा जाता है। इन्हें माता पार्वती को अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जितने अधिक गुने चढ़ाए जाते हैं, उतनी ही परिवार में खुशहाली और समृद्धि आती है। पूजा के बाद ये गुने परिवार की महिलाओं में बांटे जाते हैं।





