BY
Yoganand Shrivastava
Jharsuguda (ओडिशा): ओडिशा के सुंदरगढ़ और झारसुगुड़ा जिलों से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ 10वीं के श्राद्ध कर्म के दौरान आयोजित सामूहिक भोज में शामिल होना लोगों पर भारी पड़ गया। दूषित भोजन खाने (फूड पॉइजनिंग) की वजह से दो अलग-अलग गांवों के 4 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 25 से अधिक लोग जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में जंग लड़ रहे हैं। इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप और दहशत का माहौल है।

Jharsuguda सुंदरगढ़ के नुआडीही गांव में पहली घटना: भोज के बाद बिगड़ी तबीयत
हादसे की शुरुआत सुंदरगढ़ जिले के हेमगिरी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले नुआडीही गांव से हुई। यहाँ एक परिवार में दशगात्र (10वीं का श्राद्ध) का कार्यक्रम था, जिसमें गांव और आसपास के कई मेहमान भोजन करने पहुंचे थे। खाना खाने के कुछ ही घंटों बाद लोगों को तेज पेट दर्द, उल्टी और दस्त (डायरिया) की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते चीख-पुकार मच गई और बीमारों को तुरंत हेमगिरी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहाँ इलाज के दौरान दो लोगों ने दम तोड़ दिया, जबकि 10 अन्य की हालत नाजुक बनी हुई है।

Jharsuguda झारसुगुड़ा के सोनाखाइन गांव तक फैला असर: दो महिलाओं की मौत
इसी भोज से जुड़ी दूसरी दुखद घटना पड़ोसी जिले झारसुगुड़ा के लखनपुर ब्लॉक स्थित अताबिरा सोनाखाइन गांव में देखने को मिली। इस गांव के लगभग 25 लोग सुंदरगढ़ के नुआडीही गांव में काम करने और भोज में शामिल होने गए थे। गुरुवार को वापस लौटने के बाद इनमें से कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। शुक्रवार को हालत गंभीर होने पर इन्हें झारसुगुड़ा जिला मुख्यालय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान दो महिलाओं—40 वर्षीय झांसी खड़िया और 60 वर्षीय सुकांति खड़िया की मौत हो गई।
गंभीर रूप से बीमार 5 अन्य मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बुरला रेफर किया गया था, लेकिन वहाँ आईसीयू (ICU) बेड उपलब्ध न होने के कारण उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
Jharsuguda सरपंच ने की मुआवजे की मांग, गांवों में डॉक्टरों की टीम तैनात
सोनाखाइन गांव के सरपंच ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से मांग की है कि मृतकों के आश्रित परिवारों को तुरंत उचित मुआवजा (आर्थिक सहायता) दिया जाए और निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करे।
Jharsuguda मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की एक संयुक्त जांच टीम का गठन किया है। लखनपुर और हेमगिरी सीएचसी (CHC) के डॉक्टरों का दल प्रभावित गांवों में डेरा डाले हुए है और घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रहा है। वहीं, खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा भोजन के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए लैब भेजने की तैयारी की जा रही है ताकि जहरखुरानी या लापरवाही के असली कारणों का पता लगाया जा सके।





