Bhopal : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सूबे को जल-समृद्ध बनाने के लिए चलाया जा रहा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ अब एक विशाल जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। गंगा दशहरा (25 मई) के पावन अवसर पर पूरे प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में व्यापक जल संरक्षण गतिविधियों और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने समाज के हर वर्ग से आह्वान किया है कि वे पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए इस पुनीत कार्य में श्रमदान कर सीधे जुड़ें।
Bhopal उज्जैन में दो दिवसीय ‘शिप्रा तीर्थ परिक्रमा’; मैथिली ठाकुर और नेवी बैंड बिखेरेंगे जलवा
गंगा दशहरा के पावन पर्व पर उज्जैन में महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा 25 और 26 मई को दो दिवसीय भव्य ‘शिप्रा तीर्थ परिक्रमा’ का आयोजन किया जा रहा है।

- परिक्रमा का मार्ग: यह यात्रा ऐतिहासिक रामघाट से शुरू होकर नृसिंहघाट, कर्कराज मंदिर, वेधशाला, महामृत्युंजय द्वार और प्रशांतिधाम शनि मंदिर होते हुए दत्तअखाड़ा घाट पहुंचेगी। अगले दिन रणजीत हनुमान मंदिर, सिद्धवट, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम और गोपाल मंदिर होते हुए पुनः रामघाट पर संपन्न होगी।
- मुख्यमंत्री की विशेष उपस्थिति: इस महा-आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं माँ शिप्रा को 300 फीट लंबी चुनरी अर्पित करेंगे।
- सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: रामघाट पर 17 मई से ही ‘हरिकथा’ का गायन जारी है। दत्तअखाड़ा घाट पर होने वाली भजन संध्या में जबलपुर की लोक गायिका संजो बघेल और इंदौर के श्रेयश शुक्ला प्रस्तुति देंगे। इसके अलावा, 26 मई को मुख्य आकर्षण के रूप में भारतीय नौसेना (Indian Navy) के बैंड का प्रदर्शन, मुंबई के केशवम् बैंड द्वारा भजन जैमिंग और सुप्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर की सुमधुर प्रस्तुतियां होंगी।
Bhopal दो चरणों में मनेगा उत्सव: पाप मुक्ति के साथ ‘राष्ट्रीय मॉडल’ बनाने की तैयारी
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, और इस दिन जल स्रोतों का संरक्षण व पूजन करने से मनुष्य के दस प्रकार के पापों का नाश होता है। इसी महत्ता को देखते हुए प्रदेश के कार्यक्रमों को दो चरणों में बांटा गया है:
- प्रथम चरण (श्रमदान): सभी जिलों के प्रभारी मंत्री, सांसद, विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधि जनता के साथ मिलकर कुओं, बावड़ियों, तालाबों और घाटों की साफ-सफाई करेंगे। साथ ही, पुराने बंद पड़े बोरवेल के पास ‘रिचार्ज पिट’ का निर्माण किया जाएगा।
- द्वितीय चरण (सांस्कृतिक संध्या): शाम को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इसके तहत प्रत्येक जिले में 4 से 5 ऐसे उत्कृष्ट जल संरक्षण कार्यों को चिन्हित किया जाएगा, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल के रूप में पेश किया जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में जिला पंचायत सीईओ और शहरी क्षेत्रों में नगर निगम आयुक्त इसके नोडल अधिकारी बनाए गए हैं।
Bhopal आंकड़ों में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की ऐतिहासिक सफलता
19 मार्च से 30 जून 2026 तक चलने वाले इस युगांतकारी अभियान ने राज्य में जल आत्मनिर्भरता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
| अभियान की मुख्य कड़ियां | आधिकारिक आंकड़े / प्रगति |
| कुल लक्षित कार्य | 3,68,673 |
| अब तक पूर्ण हुए कार्य | 1,91,294 (84,468 पूरी तरह संपन्न + 1,06,826 भौतिक रूप से पूर्ण) |
| कुल स्वीकृत बजट | 10,666.62 करोड़ रुपये |
| अब तक खर्च की गई राशि | 6,293.48 करोड़ रुपये (कुल बजट का 59%) |
| डग वेल (कुआं) रिचार्ज | 90,814 (भूजल संवर्धन के लिए) |
| फार्म पॉन्ड (खेत तालाब) निर्माण | 56,198 (ग्रामीण समृद्धि का आधार) |
| जल संरक्षण एवं रिचार्ज श्रेणी | 29,096 कार्य पूरे |
| अमृत सरोवरों का जीर्णोद्धार | 115 सरोवर पुनर्जीवित |
| स्कूलों में टंकियों की सफाई | ‘वॉव’ (WoW) ऐप के जरिए 3,670 पानी की टंकियां साफ |
इसके अतिरिक्त, वाटरशेड संबंधी 4,678 कार्य, पारंपरिक जल संरचनाओं के मरम्मत के 2,663 कार्य और 1,133 सिंचाई अधोसंरचना के कार्यों को कुशलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में जारी यह महाअभियान देश के लिए एक अनुकरणीय जल-क्रांति बनकर उभर रहा है।
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