Deer Rescue: मगरलोड में सूखे कुएं में गिरा चीतल, वन अमले ने किया ऐसे रेस्क्यू

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Deer Rescue: पानी की तलाश में गांव पहुंचा चीतल, सूखे कुएं में गिरा

मगरलोड के ग्राम अंजोरा से एक Deer Rescue का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि पानी की तलाश में जंगल से भटककर एक चीतल गांव की ओर आ गया और वहां एक सूखे कुएं में गिर गया।
जब ग्रामीणों की नजर कुएं में गिरे चीतल पर पड़ी तो उन्होंने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी।

Deer Rescue: वन विभाग की टीम ने सुरक्षित बाहर निकालकर जंगल में छोड़ा

सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक रेस्क्यू अभियान चलाया। काफी प्रयास के बाद चीतल को सुरक्षित कुएं से बाहर निकाला गया।
रेस्क्यू के बाद वन अमले ने चीतल को उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया। इस दौरान ग्रामीणों की भीड़ भी मौके पर मौजूद रही और सभी ने वन विभाग की इस कार्रवाई की सराहना की।

ग्रामीण और वन क्षेत्र के आसपास बने खुले तथा सूखे कुएं वन्य प्राणियों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। अक्सर पानी की तलाश में जंगलों से निकलकर गांवों की ओर आने वाले जानवर इन खुले कुओं में गिर जाते हैं। चीतल, हिरण, सियार, नीलगाय, तेंदुआ और कभी-कभी भालू जैसे वन्य जीव भी ऐसे हादसों का शिकार हो चुके हैं। कई मामलों में समय पर सूचना मिलने से वन विभाग की टीम रेस्क्यू कर जानवरों को बचा लेती है, लेकिन कई बार गहराई और फिसलन के कारण उनकी मौत भी हो जाती है।

दरअसल ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे पुराने या सूखे कुएं हैं जिन पर न तो जाली लगी होती है और न ही कोई सुरक्षा दीवार बनाई जाती है। रात के समय या घास-पानी की तलाश में भटकते वन्य जीवों को ये कुएं दिखाई नहीं देते और वे सीधे उसमें गिर जाते हैं। इसके अलावा गर्मियों के मौसम में जब जंगलों में जल स्रोत कम हो जाते हैं, तब वन्य प्राणी पानी की तलाश में आबादी वाले इलाकों की ओर ज्यादा आने लगते हैं। ऐसे समय में दुर्घटनाओं की संभावना और बढ़ जाती है।

वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए प्रशासन और वन विभाग को कुछ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। सबसे पहले खुले और सूखे कुओं के चारों ओर मजबूत जाली या दीवार बनाना जरूरी है, ताकि कोई भी जानवर उसमें गिर न सके। जिन कुओं का उपयोग नहीं हो रहा है, उन्हें ढंकने या भरने की व्यवस्था भी की जा सकती है। इसके साथ ही वन क्षेत्रों के पास अधिक से अधिक जल स्रोत विकसित किए जाने चाहिए, ताकि जानवरों को पानी के लिए गांवों की ओर न आना पड़े।

ग्रामीणों की जागरूकता भी इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी कुएं में वन्य जीव गिर जाए तो तुरंत वन विभाग को सूचना देना और रेस्क्यू में सहयोग करना जरूरी है। प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय लोगों की संयुक्त पहल से ही वन्य प्राणियों को ऐसे खतरों से बचाया जा सकता है और जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखा जा सकता है।

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