BY
Yoganand Shrivastava
Kanpur न्याय मिलने में देरी भले ही हुई, लेकिन अंततः सच की जीत हुई। कानपुर की एक पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने भारतीय वायुसेना (IAF) के एक कर्मी को अपनी नाबालिग साली के साथ छेड़छाड़ के आरोपों से बरी कर दिया है। यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि 7 साल तक चले इस कानूनी संघर्ष का अंत पीड़िता के उस बयान से हुआ, जिसमें उसने स्वीकार किया कि असल में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई थी, बल्कि उसे एक ‘बुरा सपना’ आया था।
Kanpur सपने और हकीकत का भ्रम: कोर्ट में पीड़िता का यू-टर्न
दिसंबर 2021 में ट्रायल के दौरान जब पीड़िता (साली) के बयान दर्ज किए गए, तो कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। उसने अदालत को बताया कि घटना वाली रात वह नशीली एंटीबायोटिक दवाएं लेकर सो रही थी। नींद में उसे सपना आया कि उसके जीजा ने उसे पकड़ लिया है, जिसके बाद उसने शोर मचा दिया। उसने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि “जीजू ने सपने में छेड़ा था, हकीकत में नहीं।” इस बयान के बाद केस की पूरी दिशा ही बदल गई।
Kanpur संपत्ति विवाद और झूठी FIR का आरोप
बरी होने के बाद एयरफोर्स कर्मी अनुराग शुक्ला ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि यह पूरी साजिश उनके ससुर द्वारा रची गई थी। अनुराग के अनुसार, शादी के महज 10 दिन बाद ही उनके ससुर उन पर अपनी संपत्ति पत्नी और साली के नाम करने का दबाव बना रहे थे। इनकार करने पर उन्हें इस झूठे केस में फंसा दिया गया। इस आरोप की वजह से उन्हें 19 दिन जेल में बिताने पड़े और वायुसेना जैसी प्रतिष्ठित नौकरी में उनका प्रमोशन भी रुक गया।
Kanpur 7 साल का मानसिक दंश और कानूनी प्रक्रिया
यह मामला फरवरी 2019 में शुरू हुआ था, जब शादी के कुछ ही दिन बाद नौबस्ता थाने में FIR दर्ज कराई गई थी।
- अक्टूबर 2019: पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की।
- 7 साल का संघर्ष: सामाजिक बेइज्जती और करियर में रुकावट।
- न्याय: पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने पीड़िता, उसके पिता और बड़ी बहन के बयानों को ‘भ्रम’ मानते हुए आरोपी को ससम्मान दोषमुक्त किया।





