Lucknow उत्तर प्रदेश में ओला (Ola) और उबर (Uber) जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों के जरिए सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को लेकर योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने घोषणा की कि अब इन कंपनियों को उत्तर प्रदेश में अनिवार्य रूप से पंजीकरण (Registration) कराना होगा। नए नियमों के तहत अब बिना वैध लाइसेंस, फिटनेस और ड्राइवर के पुलिस वेरिफिकेशन के कोई भी टैक्सी संचालित नहीं हो सकेगी।

Lucknow ड्राइवर का डेटा होगा सार्वजनिक, पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य
परिवहन मंत्री ने बताया कि अब तक इन कंपनियों पर सरकार का कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं था, जिससे यह पता लगाना मुश्किल होता था कि गाड़ी कौन चला रहा है। अब मोटर व्हीकल एक्ट की संशोधित धाराओं के तहत, हर ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन, मेडिकल टेस्ट और फिटनेस टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार एक विशेष ऐप भी विकसित करेगी, जिसके जरिए ड्राइवरों की समस्त जानकारी पब्लिक डोमेन में रहेगी, ताकि यात्री पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर सकें।

Lucknow 5 लाख रुपये लाइसेंस शुल्क और रिन्यूअल के नए नियम
सरकार ने इन कंपनियों के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया को भी सख्त कर दिया है। अब यूपी में कैब सेवा देने वाली एग्रीगेटर कंपनियों को 5 लाख रुपये का लाइसेंस शुल्क जमा करना होगा। आवेदन के लिए 25 हजार रुपये की फीस तय की गई है। यह लाइसेंस 5 वर्षों के लिए वैध होगा, जिसके बाद 5 हजार रुपये देकर इसे रिन्यू कराना होगा। भारत सरकार द्वारा जुलाई 2025 में किए गए नियमों के संशोधनों को अब उत्तर प्रदेश में पूरी तरह लागू किया जा रहा है।

Lucknow अधिसूचना जारी होते ही थमेगी अवैध टैक्सियों की रफ्तार
परिवहन विभाग जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगा। इसके बाद, बिना पंजीकरण शुल्क चुकाए और बिना फिटनेस मानकों को पूरा किए कोई भी ओला या उबर टैक्सी सड़कों पर नहीं चल पाएगी। परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य न केवल राजस्व जुटाना है, बल्कि परिवहन प्रणाली में पारदर्शिता लाना और यात्रियों को एक सुरक्षित यात्रा का अनुभव प्रदान करना है।





