IRIS Lavan: 28 फरवरी को ईरानी युद्धपोत IRIS Lavan में तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हुईं। इसके बाद ईरान ने भारत से डॉकिंग की अनुमति मांगी। भारत ने 1 मार्च को इसे डॉक करने की मंजूरी दे दी और युद्धपोत को कोच्चि नौसेना परिसर में रखा गया। सभी 183 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित जगह पर ठहराया गया।
IRIS Lavan इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में था
सूत्रों के मुताबिक, IRIS Lavan 4 मार्च को कोच्चि में डॉक हुआ। यह युद्धपोत उस समय इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के लिए हिंद महासागर में था। श्रीलंका के दक्षिण में पहले हुए हमले के कुछ दिन पहले ईरान ने भारत से संपर्क किया था।
IRIS Lavan: IRIS Dena को अमेरिका ने डुबोया
इसी हफ्ते IRIS Dena युद्धपोत को अमेरिका की पनडुब्बी ने हिंद महासागर में टारपीडो हमले में डुबो दिया। यह जहाज भारी तोपों, एंटी-शिप मिसाइलों और हेलीकॉप्टर से लैस था। IRIS Dena भारत के विशाखापत्तनम में मिलान नेवल एक्सरसाइज में हिस्सा लेने के बाद ईरान लौट रहा था।
IRIS Lavan: हमले में 87 नाविक शहीद
इस टारपीडो हमले में कम से कम 87 नाविक मारे गए। श्रीलंका ने राहत और बचाव अभियान चलाया, जबकि इंडियन नेवी ने INS तरंगिनी और INS इक्शाक को सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए तैनात किया। लगभग 32 लोगों को बचाया गया।
IRIS Lavan: ईरान ने अमेरिका पर हमला बिना चेतावनी का आरोप लगाया
ईरान ने IRIS Dena पर अमेरिकी हमले की आलोचना करते हुए कहा कि युद्धपोत को बिना किसी वॉर्निंग के नष्ट किया गया। मुंबई में ईरान के कॉन्सुल जनरल सईद रजा मोसायेब मोतलाग ने बताया कि अचानक हमले की वजह से जहाज में धमाका हुआ और लगभग 100 लोगों की मौत हुई, जिनमें बहादुर ईरानी सैनिक भी शामिल थे।





