Report: Imnran khan
Chhatarpur सनातन धर्म और हिंदू राष्ट्र की अलख जगाने वाले बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जल्द ही एक लंबे एकांतवास पर जा रहे हैं। गुरु आज्ञा का पालन करते हुए वे आधुनिक दुनिया के तमाम शोर-शराबे और नेटवर्क से पूरी तरह कट जाएंगे। आगामी मई के महीने में वे मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित अपने धाम को छोड़कर उत्तराखंड की बर्फीली वादियों में ईश्वर की भक्ति और विशेष साधना में लीन होंगे।
डिजिटल दुनिया और कथाओं से पूरी तरह रहेंगे दूर
Chhatarpur धीरेंद्र शास्त्री ने स्वयं इस ‘गुप्त साधना’ की जानकारी देते हुए बताया कि इस एक महीने के दौरान वे न तो कोई कथा करेंगे और न ही उनका प्रसिद्ध ‘दिव्य दरबार’ लगेगा। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वे मोबाइल, टीवी, सोशल मीडिया और मीडिया इंटरव्यू से भी पूरी तरह दूरी बना लेंगे। इस अवधि में वे किसी भी व्यक्ति के संपर्क में नहीं रहेंगे, जिससे उनके भक्तों के बीच इस कठिन तपस्या को लेकर काफी चर्चा है।
बद्रीनाथ के बर्फीले पहाड़ों में ‘एकांतवास’ की तैयारी
Chhatarpur खबरों के मुताबिक, बागेश्वर महाराज अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा के लिए उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम के ऊंचे और दुर्गम पहाड़ों को चुन सकते हैं। कड़ाके की ठंड और एकांत वातावरण के बीच वे अपनी मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति को और प्रगाढ़ करने के लिए ध्यान लगाएंगे। यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, जहाँ वे सांसारिक जिम्मेदारियों को कुछ समय के लिए विराम देकर केवल साधना पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
गुरु की आज्ञा और सनातन का संकल्प
Chhatarpur धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार, यह फैसला उन्होंने अपने गुरु की आज्ञा और अंतर्मन की पुकार पर लिया है। अक्सर विवादों और चर्चाओं के केंद्र में रहने वाले शास्त्री का मानना है कि सनातन धर्म के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए आत्मिक शांति और गहन ध्यान अनिवार्य है। मई महीने में उनके इस अज्ञातवास पर जाने से पहले बागेश्वर धाम में उनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।





