MP employee salary arrears: मध्य प्रदेश में करीब एक लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका है। जबलपुर हाईकोर्ट ने प्रोबेशन पीरियड में वेतन कटौती के नियम को अवैध और भेदभावपूर्ण करार दिया था। अब राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है।
इस फैसले के चलते कर्मचारियों को मिलने वाले करीब 400 करोड़ रुपए के एरियर्स पर खतरा मंडरा सकता है।
MP employee salary arrears: हाईकोर्ट का फैसला- भेदभावपूर्ण और अवैध
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोत ने स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारियों का वेतन प्रोबेशन पीरियड में कम करना नैसर्गिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि “जब कर्मचारियों से पूरा काम लिया जा रहा है, तो उन्हें पूरा वेतन भी मिलना चाहिए।
MP employee salary arrears: एक ही पद के लिए अलग-अलग नियम
- हाईकोर्ट ने इस फैसले का आधार यह बताया कि MPPSC और कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) से भर्ती कर्मचारियों के लिए नियम अलग बनाए गए थे।
- MPPSC से भर्ती कर्मचारियों को 2 साल के प्रोबेशन में पूरा वेतन मिलता था।
- कर्मचारी चयन मंडल के कर्मचारियों को 4 साल का प्रोबेशन और वेतन कटौती का सामना करना पड़ रहा था।
- कोर्ट ने इसे समानता के अधिकार का उल्लंघन माना और 12 दिसंबर 2019 के संबंधित परिपत्र को निरस्त कर दिया।
MP employee salary arrears: विभिन्न पदों पर अनुमानित एरियर राशि
| पद का नाम | पे ग्रेड (₹) | अनुमानित एरियर राशि (₹) |
|---|---|---|
| प्राथमिक शिक्षक | 2400 | 3,55,000 |
| सहायक ग्रेड-3 | 1900 | 2,85,693 |
| चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी | 1550 | 1,74,840 |
| तृतीय श्रेणी कर्मचारी | 1800 | 2,01,540 |
MP employee salary arrears: सुप्रीम कोर्ट जाने का सरकार का तर्क
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के पीछे दो मुख्य तर्क हो सकते हैं:
- MPPSC और कर्मचारी चयन मंडल की भर्ती प्रक्रियाओं में अंतर।
- MPPSC में तीन स्तरीय परीक्षा होती है, जबकि कर्मचारी चयन मंडल की भर्ती मुख्यतः एक स्तरीय लिखित परीक्षा है।
- सरकार इसे अलग नियमों को उचित ठहराने के लिए इस्तेमाल कर सकती है।
MP employee salary arrears: विभागों में असमंजस, राहत की संभावना कम
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का फैसला “समान काम, समान वेतन” के मजबूत कानूनी सिद्धांतों पर आधारित है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट से सरकार को राहत मिलने की संभावना कम मानी जा रही है।
विभागों में भी इस मामले को लेकर असमंजस है। जीएडी और वित्त विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते दिख रहे हैं।
MP employee salary arrears: किन कर्मचारियों को होगा फायदा
यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है, तो MPESB द्वारा भर्ती तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को फायदा होगा। इनमें शामिल हैं:
- लिपिक वर्ग (तृतीय श्रेणी): सहायक ग्रेड-3, वरिष्ठ सहायक, स्टेनो, डेटा एंट्री ऑपरेटर, लेखापाल व सहायक लेखापाल।
- अलिपिक वर्ग: पटवारी, तकनीशियन, विभिन्न विभागों में सहायक।
- इंजीनियरिंग पद: सब-इंजीनियर (सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल), असिस्टेंट इंजीनियर।
- तकनीकी पद: प्रयोगशाला तकनीशियन, बायोमेडिकल इंजीनियर, फील्ड ऑफिसर।
- निरीक्षक पद: निरीक्षक (नाप-तौल), स्वच्छता निरीक्षक, जूनियर सप्लाई ऑफिसर।
- अन्य पद: सहायक प्रबंधक, सहायक मानचित्रकार आदि।
- चतुर्थ श्रेणी: सहायक ग्रेड-3, स्टेनो-टाइपिस्ट, डेटा एंट्री ऑपरेटर, कंप्यूटर ऑपरेटर, कोडिंग क्लर्क।
- ग्राम पंचायत/जनपद स्तर: चौकीदार, पंप ऑपरेटर, भृत्य, सफाई कर्मी।
- नगर निगम/नगरपालिका स्तर: बेलदार, माली, चपरासी आदि।
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