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MP Gulf Help Desk : भोपाल, वर्तमान में इजराइल-यूएस बनाम ईरान युद्ध के कारण अप्रत्याशित अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश शासन ने खाड़ी देशों में निवासरत मध्यप्रदेश के नागरिकों की सहायता के लिए मध्यप्रदेश भवन, नई दिल्ली में स्थित मध्य प्रदेश भवन में 24×7 कंट्रोल रूम की स्थापना की है। यह पहल प्रदेशवासियों को त्वरित सहायता, सही जानकारी और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।

MP Gulf Help Desk : हर परिस्थिति में सहयोग का भरोसा
खाड़ी देशों में अध्ययन, रोजगार, व्यवसाय, पर्यटन अथवा अन्य किसी कारण से रह रहे मध्यप्रदेश के नागरिक यदि किसी भी प्रकार की आपात या सामान्य समस्या का सामना कर रहे हैं, तो वे इस कंट्रोल रूम से सीधे संपर्क कर सकते हैं। कंट्रोल रूम का उद्देश्य संकट की घड़ी में प्रदेशवासियों और उनके परिजनों को एक भरोसेमंद संपर्क बिंदु उपलब्ध कराना है।
MP Gulf Help Desk : समन्वय के माध्यम से त्वरित सहायता
कंट्रोल रूम आवश्यकतानुसार भारत सरकार तथा संबंधित दूतावासों और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर सहायता उपलब्ध कराएगा। इससे दस्तावेज़ी सहायता, जानकारी, मार्गदर्शन अथवा अन्य आवश्यक सहयोग शीघ्रता से सुनिश्चित किया जा सकेगा।
MP Gulf Help Desk : 24×7 कंट्रोल रूम संपर्क विवरण
दूरभाष: 011-26772005
- व्हाट्सएप: 9818963273
- ई-मेल: mphelpdeskgulf@gmail.com
- MP Gulf Help Desk : प्रदेशवासियों से अपील
मध्यप्रदेश शासन ने खाड़ी देशों में रह रहे सभी प्रदेशवासियों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की आवश्यकता पड़ने पर घबराएं नहीं और उपलब्ध कराए गए संपर्क माध्यमों का उपयोग करें। यह कंट्रोल रूम उनकी सुरक्षा, सुविधा और सहयोग के लिए चौबीसों घंटे सक्रिय है।
यह पहल न केवल प्रदेशवासियों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर रह रहे मध्यप्रदेश के नागरिकों के साथ सतत संवाद और सहयोग की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।

आपको बता दें कि खाड़ी देशों में भारत के लगभग 90 लाख नागरिक निवास करते हैं, जो विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सबसे बड़ी आबादी में से एक है। इसमें मध्य प्रदेश के लोग भी बड़ी संख्या में संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन जैसे देशों में भारतीय बड़ी संख्या में रोजगार, व्यापार, शिक्षा और व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। ये प्रवासी भारतीय न केवल अपने परिवारों का आर्थिक सहारा बने हुए हैं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। खाड़ी देशों से भारत को हर वर्ष बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा प्रेषण (रेमिटेंस) प्राप्त होता है। संकट की परिस्थितियों में इन भारतीयों की सुरक्षा और सहायता सरकार की प्रमुख प्राथमिकता रहती है।





