Kozhikode : वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री के.पी. उन्नीकृष्णन का निधन, केरल में शोक की लहर

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Kozhikode

Kozhikode भारतीय राजनीति के एक कद्दावर स्तंभ और पूर्व केंद्रीय मंत्री के.पी. उन्नीकृष्णन का आज सुबह कोझिकोड के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन पर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन सहित देश के कई बड़े नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे भारतीय राजनीति के एक युग का अंत बताया है।

समाजवादी विचारधारा के पुरोधा और संसदीय गौरव

Kozhikode के.पी. उन्नीकृष्णन को भारतीय संसद के उन चुनिंदा नेताओं में गिना जाता था जो सदन को केवल संख्या बल का केंद्र नहीं, बल्कि वैचारिक विमर्श का मंच मानते थे। अपनी स्पष्ट वाक्पटुता और समाजवादी सिद्धांतों के लिए पहचाने जाने वाले उन्नीकृष्णन ने आपातकाल के दौरान तानाशाही के खिलाफ प्रखर आवाज उठाई थी। वे राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के दौरान केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

वडाकारा निर्वाचन क्षेत्र से अटूट रिश्ता

Kozhikode उन्नीकृष्णन का चुनावी सफर बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने केरल के वडाकारा लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व लगातार कई दशकों तक किया। 1971 में पहली बार सांसद चुने जाने के बाद, उन्होंने 1977, 1980, 1984, 1989 और 1991 के चुनावों में लगातार जीत हासिल की। उनका अपने क्षेत्र की जनता से ऐसा मजबूत जुड़ाव था कि उनकी लोकप्रियता अक्सर पार्टी की सीमाओं को पार कर जाती थी।

सोशलिस्ट पार्टी से कांग्रेस तक का राजनीतिक सफर

Kozhikode उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1960 के दशक में सोशलिस्ट पार्टी के साथ हुई थी, लेकिन जल्द ही वे कांग्रेस के साथ जुड़ गए। 1962 में वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य बने और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान स्थापित की। वे केरल की उस पीढ़ी के अंतिम प्रतिनिधि थे, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत की वैचारिक उथल-पुथल को बहुत करीब से देखा और उसे दिशा देने का कार्य किया।

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