BY
Yoganand Shrivastava
Prayagraj : ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। पुलिसिया कार्रवाई के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनके वकीलों ने कोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका दाखिल कर गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं की टीम ने दाखिल की अर्जी
Prayagraj स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश के माध्यम से यह याचिका कोर्ट में पेश की गई। याचिका में लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए राहत की मांग की गई है। कानूनी गलियारों में चर्चा है कि इस संवेदनशील मामले पर हाई कोर्ट में बेहद जल्द सुनवाई हो सकती है।
क्या है विवाद: रामभद्राचार्य के शिष्य ने लगाए हैं गंभीर आरोप
Prayagraj यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिला अदालत में शिकायत दर्ज कराई।
- अदालत का रुख: एडीजे (रेप एंड पोक्सो स्पेशल कोर्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रयागराज की झूंसी पुलिस को तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया था।
- आरोपी: एफआईआर में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और 2-3 अन्य अज्ञात लोगों को भी नामजद किया गया है।
कठोर धाराएं और उम्रकैद तक का प्रावधान
Prayagraj झूंसी पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की सात अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
- गंभीर धाराएं: एफआईआर में पॉक्सो एक्ट की धारा 5l, 6, 3, 4(2), 16 और 17 शामिल हैं।
- सजा की गंभीरता: इन धाराओं में अपराध सिद्ध होने पर 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।
- कानूनी पेच: विशेषज्ञों का मानना है कि पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में अंतरिम राहत मिलना काफी चुनौतीपूर्ण होता है, यही वजह है कि सबकी नजरें अब हाई कोर्ट के रुख पर टिकी हैं।





