Madhya Pradesh : मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (मैपकास्ट) के विज्ञान भवन में श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘राष्ट्रीय शोधार्थी समागम 2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश भर से आए शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि अनुसंधान मानवीय प्रज्ञा को ‘प्रज्ञान’ में बदलने का माध्यम है। उन्होंने शोध को वैज्ञानिक पद्धतियों का जनक बताते हुए शोधार्थियों से निर्भीक होकर नए क्षेत्रों में अन्वेषण करने का आह्वान किया।

भारतीय संस्कृति और ‘स्वदेशी दृष्टि’ पर आधारित हो शोध
Madhya Pradesh मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक ज्ञान पर लंबे समय से पश्चिमी देशों का प्रभाव रहा है, जिससे हमारी संस्कृति भी प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में ‘एकल शोध’ का स्थान नहीं है; हमारा शोध समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए ‘सहयोगात्मक’ होना चाहिए।
- मशीन बनाम मनुष्य: पूज्य आचार्य श्री मिथलेशनन्दिनीशरण महाराज ने कहा कि शोधार्थी वास्तव में ‘बोधार्थी’ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेटा का विश्लेषण मशीनों का काम है, जबकि मनुष्य का ज्ञान ‘चिंतन’ पर आधारित होना चाहिए।
- पुनरुत्थान का संकल्प: वरिष्ठ चिंतक श्री सुरेश सोनी ने बीज वक्तव्य में कहा कि पिछले 200 वर्षों की यूरोपीय अकादमिक शिक्षा के प्रभाव को छोड़कर अब हमें कला, न्याय और अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर भारतीय शिक्षा पद्धति के आधार पर शोध करना होगा।
“Mahakal: The Master of Time” वेबसाइट और पुस्तकों का विमोचन
Madhya Pradesh समागम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ज्ञान के प्रसार के लिए कई महत्वपूर्ण डिजिटल और प्रिंट माध्यमों का लोकार्पण किया:

- डिजिटल नवाचार: “Mahakal: The Master of Time” वेबसाइट और महाकाल ब्रोशर का शुभारंभ किया गया।
- वैज्ञानिक प्रोत्साहन: 41वें मध्य प्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन एवं विज्ञान उत्सव के पोस्टर का विमोचन।
- साहित्यिक योगदान: दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा प्रकाशित अनुसंधान परक लेखन की सात पुस्तकों का विमोचन। मुख्यमंत्री ने विज्ञान भवन परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
विकसित भारत @2047: विश्व गुरु बनने की राह
Madhya Pradesh उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि यह समागम ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ के अनुरूप भारत केंद्रित परंपराओं और संस्कृति को शोध से जोड़ने का एक सशक्त मंच है।
- लक्ष्य: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को पूरा करने में शोधार्थियों की भूमिका अहम होगी।
- दृष्टिकोण: प्रो. मधुकर एस पड़वी ने शोधार्थियों से अपील की कि वे दूसरे देशों की दृष्टि का अनुसरण करने के बजाय ‘स्वदेशी दृष्टि’ अपनाएं।
- प्रतिबद्धता: राज्य सरकार मध्य प्रदेश को शोध और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।





