Madhya Pradesh सीहोर जिले के अमलाहा स्थित अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (ICARDA) में आयोजित राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान इकार्डा के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र और अत्याधुनिक प्लांट टिशु कल्चर प्रयोगशाला का उद्घाटन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केंद्र न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के किसानों के लिए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के नए द्वार खोलेगा।

Madhya Pradesh ‘बीज से बाजार तक’ किसानों का साथ: दलहन मिशन के तहत ₹11,440 करोड़ का प्रावधान
Madhya Pradesh केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत सरकार ने ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ के लिए 11,440 करोड़ रुपये की विशाल राशि निर्धारित की है।

- उत्पादन का लक्ष्य: मिशन का उद्देश्य वर्ष 2030-31 तक देश में दलहन उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना है ताकि आयात पर निर्भरता खत्म हो सके।
- किसानों को सीधा लाभ: मध्यप्रदेश को इस मिशन के तहत 354 करोड़ रुपये की प्रारंभिक बजट राशि आवंटित की गई है।
- प्रोत्साहन और अनुदान: दलहन उत्पादन करने वाले आदर्श किसानों को प्रति हेक्टेयर 10 हजार रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, दाल मिल स्थापित करने के लिए भारत सरकार 25 लाख रुपये तक का अनुदान देगी। देश में कुल 1000 नई दाल मिलें खुलेंगी, जिनमें से 55 मध्यप्रदेश में स्थापित होंगी।
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर शत-प्रतिशत खरीदी: केंद्र सरकार ने तुअर (₹8000), उड़द (₹7800), मसूर (₹7000) और चना (₹5875) प्रति क्विंटल की दर से शत-प्रतिशत खरीदने का संकल्प लिया है।
Madhya Pradesh सिंचाई और तकनीक से बदलेगी खेती की तस्वीर: 100 लाख हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य
Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को “भारत का फूड बॉस्केट” बताते हुए कृषि विस्तार के लिए जल प्रबंधन को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि नदियों का मायका होने के बावजूद प्रबंधन की कमी से कई क्षेत्र सिंचाई से वंचित थे, लेकिन अब सरकार ने आने वाले वर्षों में सिंचाई का रकबा 44 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है।

- नदी जोड़ो परियोजनाएं: केन-बेतवा लिंक परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) परियोजना से प्रदेश की सिंचाई क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि होगी।
- फसल चक्र और मृदा स्वास्थ्य: केंद्रीय मंत्री ने किसानों से केवल पारंपरिक गेहूं-सोयाबीन के बजाय फसल चक्र अपनाने और दलहन की खेती पर जोर देने की अपील की।
- वैज्ञानिक अनुसंधान: इकार्डा और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) मिलकर ऐसी किस्में तैयार कर रहे हैं जो अधिक उत्पादन देने वाली और रोगमुक्त हों। मध्यप्रदेश की उत्पादकता (1200 किग्रा/हेक्टेयर) पहले से ही राष्ट्रीय औसत (926 किग्रा/हेक्टेयर) से अधिक है, जिसे और बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
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