Report: Vishal kumawat
Narsinghpur : जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) ऋषिकेश मीणा की एक लीक से हटकर की गई पहल ने वह कर दिखाया जो भारी-भरकम इनाम और पुलिस की छापेमारी नहीं कर पाई। शराब तस्करी के एक शातिर अपराधी पर पुलिस ने महज 1 रुपये का प्रतीकात्मक इनाम घोषित किया, जिससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर ऐसी चोट पहुँची कि वह खुद ही थाने सरेंडर करने पहुँच गया।
माफिया की हैसियत बताने के लिए ‘एक रुपया’ काफी
Narsinghpur आमतौर पर फरार अपराधियों पर हजारों या लाखों के इनाम रखे जाते हैं, जिसे अपराधी अपनी ‘धमक’ मान लेते हैं। लेकिन एसपी ऋषिकेश मीणा ने इस बार मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Pressure) का सहारा लिया। एक महीने से फरार चल रहे शराब माफिया पर सिर्फ 1 रुपये का इनाम घोषित किया गया। इसका उद्देश्य यह संदेश देना था कि कानून की नजर में उस अपराधी की हैसियत कौड़ियों के बराबर भी नहीं है। यह तरीका माफिया के अहंकार पर सीधा प्रहार साबित हुआ।
14 मामलों का आरोपी, जेल से आते ही फिर शुरू की तस्करी
Narsinghpur गिरफ्तार हुआ आरोपी कोई छोटा अपराधी नहीं है; उसके खिलाफ विभिन्न थानों में 14 आपराधिक मामले दर्ज हैं। महज चार महीने पहले ही वह शराब तस्करी के मामले में जेल से छूटकर बाहर आया था, लेकिन जेल से निकलते ही उसने दोबारा अवैध शराब का धंधा शुरू कर दिया। पुलिस लगातार उसकी तलाश में दबिश दे रही थी, लेकिन वह कानून को ठेंगा दिखाकर फरार चल रहा था।
सामाजिक बदनामी के डर से घुटनों पर आया अपराधी
Narsinghpur जैसे ही 1 रुपये के इनाम की खबर क्षेत्र में फैली, आरोपी को समाज में अपनी ‘किरकिरी’ होने का डर सताने लगा। उसे लगा कि पुलिस के हाथों पकड़े जाने से ज्यादा अपमानजनक इस ₹1 के इनाम का टैग है। इसी सामाजिक दबाव और पुलिस की सख्त रणनीति के चलते वह चुपचाप थाने पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया। नरसिंहपुर पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर न्यायालय में पेश किया है। पुलिस की इस रचनात्मक कार्यप्रणाली की पूरे जिले में सराहना हो रही है।
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