रिपोर्ट: नफीस अहमद
Prayagraj प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के तट पर रविवार को माघ पूर्णिमा के पावन पर्व पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। ‘हर-हर गंगे’ के उद्घोष और भक्तिमय वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में आस्था की डुबकी लगाई। प्रशासन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दोपहर 12 बजे तक ही करीब 1.50 करोड़ श्रद्धालु पवित्र स्नान कर चुके थे।
ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हुआ स्नान का सिलसिला
Prayagraj रविवार तड़के सूरज उगने से पहले ही संगम के सभी प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की कतारें लग गई थीं। माघ पूर्णिमा के स्नान का विशेष महत्व होने के कारण दूर-दराज से आए लोगों ने ठिठुरन के बावजूद संगम के जल में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। संगम नोज से लेकर अरैल और अन्य घाटों तक, जहाँ तक नज़र जा रही थी, केवल श्रद्धालुओं का रेला ही दिखाई दे रहा था।

कल्पवासियों का ‘पूर्ण’ हुआ संकल्प, घर वापसी शुरू
Prayagraj माघ पूर्णिमा का दिन उन हजारों कल्पवासियों के लिए विशेष रहा, जो पौष पूर्णिमा से संगम तट पर कठिन तपस्या और कल्पवास कर रहे थे। आज अंतिम स्नान के साथ ही उनके एक माह के संयमित जीवन का संकल्प पूर्ण हुआ। स्नान और दान-पुण्य के पश्चात, कल्पवासियों ने भारी मन से अपनी रेतीली नगरी के अस्थायी निवास को अलविदा कहा और अपने घरों की ओर प्रस्थान शुरू कर दिया।

अभेद्य सुरक्षा घेरे में मेला क्षेत्र: ड्रोन से निगरानी
Prayagraj श्रद्धालुओं की विशाल संख्या को देखते हुए मेला प्रशासन और पुलिस विभाग ‘अलर्ट मोड’ पर रहा। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए एटीएस (ATS) की टुकड़ियों के साथ भारी पुलिस बल तैनात किया गया। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए की गई। स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमें और राहत दल भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए घाटों पर मुस्तैद रहे।





