BY
Yoganand Shrivastava
Prayagraj एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी डिग्रियों के सहारे क्लीनिक चला रहे मोहम्मद तरुक को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद भी झोलाछाप डॉक्टर बना हुआ था और दूसरों को भी फर्जी मेडिकल डिग्रियां बेच रहा था।
घर में बना रखी थी फर्जी डिग्री बनाने की वर्कशॉप
Prayagraj करेली के जीटीबी नगर निवासी मोहम्मद तरुक ने अपने घर को फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने का अड्डा बना रखा था। यहां कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य उपकरणों की मदद से वह अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों की नकली डिग्रियां तैयार करता था। जांच में सामने आया कि वह एक-एक व्यक्ति से छह लाख रुपये लेकर बीएएमएस की फर्जी डिग्री उपलब्ध कराता था।
खुद और पत्नी को भी बनाया डॉक्टर, खोला क्लीनिक
Prayagraj तरुक ने केवल दूसरों को ही नहीं, बल्कि खुद की और अपनी पत्नी राशिदा परवीन की भी फर्जी डिग्रियां तैयार की थीं। उसने अपनी डिग्री इलेक्ट्रो होम्योपैथी मेडिकल रिसर्च डेवलपमेंट ऑफ इंडिया के नाम से बनाई, जबकि पत्नी के नाम उत्तराखंड आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी की बीएएमएस डिग्री दर्शाई गई। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दोनों क्लीनिक चला रहे थे।
मरीज की मौत से खुला राज, STF की छापेमारी
Prayagraj मिर्जापुर के जिगना निवासी ब्रह्मानंद ने तरुक से फर्जी बीएएमएस डिग्री लेकर क्लीनिक खोला था। इलाज के दौरान एक मरीज की मौत हो गई, जिसके बाद मामले की शिकायत सीएमओ कार्यालय में की गई। पूछताछ में ब्रह्मानंद ने पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा किया। इसके बाद एसटीएफ ने टीम बनाकर तरुक के क्लीनिक पर छापा मारा और उसे गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान 65 से अधिक फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट बरामद की गईं।
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