Edit by : Priyanshi Soni
Iran protests: ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते दो हफ्तों से लाखों लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। राजधानी तेहरान से लेकर उत्तर-पश्चिमी इलाकों तक विरोध की लहर फैल चुकी है।
Iran protests: गोलीबारी में 200 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान में सरकारी कार्रवाई के दौरान 200 से अधिक लोगों की मौत की खबर सामने आई है। आरोप है कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चलाईं। हालांकि ईरानी सरकार ने इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
Iran protests: खामेनेई ने अमेरिका पर लगाया साजिश का आरोप
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका का हाथ होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि विदेशी ताकतें ईरान की स्थिरता को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।
Iran protests: इंटरनेट बंद, सुरक्षा बलों की तैनाती तेज
जैसे-जैसे प्रदर्शन उग्र होते गए, सरकार ने कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं। सोशल मीडिया तक लोगों की पहुंच सीमित कर दी गई है। हालात काबू में करने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स को भी कई शहरों में तैनात किया गया है।
Iran protests: हजारों गिरफ्तारियां, मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
मानवाधिकारों पर नजर रखने वाले संगठनों के मुताबिक, अब तक 2,300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। पहले मृतकों की संख्या 60 से अधिक बताई गई थी, जो बाद में तेजी से बढ़ने की बात कही जा रही है।
आर्थिक संकट ने भड़काया जनआक्रोश
ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से दबाव में है। अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंधों के चलते हालात और बिगड़ गए हैं। पिछले साल इजरायल के साथ हुई 12 दिनों की जंग ने संकट को और गहरा किया।
रियाल की गिरावट और महंगाई ने बढ़ाई मुश्किलें
ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत 2025 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग आधी रह गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में महंगाई दर 42 प्रतिशत के पार पहुंच गई। इसका सीधा असर आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा है।
व्यापारियों से शुरू हुआ विरोध, यूनिवर्सिटी तक पहुंचा आंदोलन
शुरुआत में बाजारों और व्यापारियों ने रियाल के गिरते मूल्य के खिलाफ प्रदर्शन किए। बाद में यह आंदोलन देशभर के विश्वविद्यालयों और शहरी इलाकों तक फैल गया, जिसने सरकार के लिए स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया।
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