Madhya Pradesh 9 January: पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने पुरातत्व को बनाया जन आंदोलन: सीएम

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Madhya Pradesh: जन-जन तक पुरातत्व पहुँचाने वाले महान विद्वान

Madhya Pradesh : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर का भारतीय पुरातत्व में योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने पुरातत्व को केवल शोध तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जन आंदोलन का स्वरूप दिया। उनके प्रभाव से उज्जैन का आम नागरिक भी अपने आसपास के परिवेश को पुरातात्विक दृष्टि से देखने लगा था। पुरातत्व को लोक रुचि का विषय बनाना उनके व्यक्तित्व और संप्रेषण क्षमता का अद्भुत उदाहरण है।

Madhya Pradesh: बहुआयामी प्रतिभा और ऐतिहासिक खोजें

Madhya Pradesh: मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. वाकणकर अनेक प्रतिभाओं के धनी थे। वे पुरातत्वविद् होने के साथ-साथ सितार वादक, मूर्तिकार, चित्रकार, कवि और संगीत साधक भी थे। उनके प्रयासों से काल गणना के महत्वपूर्ण केंद्र डोंगला की खोज हुई। उन्होंने उज्जैन क्षेत्र में गहन सर्वेक्षण कर कर्क रेखा की नई स्थिति का वैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत किया और शिलाओं व गुफाओं में छिपे प्रमाणों के माध्यम से प्राचीन भारतीय सभ्यता की कहानी विश्व के सामने रखी।

Madhya Pradesh: भीमबेटका से वैश्विक पहचान तक

Madhya Pradesh: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि भीमबेटका के शैलचित्र लगभग 30 हजार वर्ष पुराने माने जाते हैं। वर्ष 1957 में डॉ. वाकणकर द्वारा किए गए उत्खनन और अध्ययन ने भारत को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाई। आज भीमबेटका विश्व धरोहर स्थल के रूप में जाना जाता है। डॉ. वाकणकर ने महेश्वर, मंदसौर, कायथा, इंदौर सहित अनेक पुरातात्विक स्थलों के अध्ययन का नेतृत्व किया और सरस्वती नदी को ऐतिहासिक वास्तविकता के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया।

Madhya Pradesh: सम्मान, विरासत और संरक्षण का संकल्प

Madhya Pradesh: मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. वाकणकर को उनके अतुलनीय योगदान के लिए वर्ष 1975 में पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया था। उनके सम्मान में राज्य सरकार ने रातापानी अभ्यारण्य का नामकरण डॉ. विष्णु वाकणकर के नाम पर किया है। समारोह में पद्मश्री डॉ. यशोधर मठपाल को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार डॉ. वाकणकर की स्मृतियों, उनके संग्रह और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए संग्रहालयों को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित कर रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भारत की प्राचीन संस्कृति और इतिहास से जुड़ सकें।

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