BY: Yoganand Shrivastava
Dehli news: घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए अब कबूतरों को खुले में दाना डालने पर भी पाबंदी की तैयारी शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर खाना देने पर रोक लगा चुका है और अब इसी तर्ज पर कबूतरों को लेकर भी नियम सख्त किए जा सकते हैं। कर्नाटक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने इस संबंध में शहरी विकास विभाग को पत्र लिखकर चिंता जताई है।
स्वास्थ्य विभाग ने नगर निकायों से मांगी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग ने अपने पत्र में कहा है कि बिना नियंत्रण सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को खाना खिलाना रोका जाना चाहिए। विभाग ने शहरी विकास से ग्रेटर बेंगलूरु अथॉरिटी समेत राज्य के सभी नगर निगमों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।
प्रभावित इलाकों में पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव
प्रस्तावित सर्कुलर के अनुसार, जिन इलाकों में कबूतरों को दाना डालने से स्वास्थ्य जोखिम या आमजन को परेशानी हो रही है, वहां पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा सकता है। हालांकि, कुछ तय स्थानों पर सीमित समय और नियंत्रित व्यवस्था के तहत भोजन की अनुमति दी जा सकती है। ऐसे फीडिंग जोन की देखरेख की जिम्मेदारी पंजीकृत चैरिटेबल संस्थाओं या एनजीओ को देने का सुझाव है।
जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का अधिकार
स्थानीय निकायों को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि वे नियम तोड़ने वालों को मौके पर चेतावनी दें, जुर्माना लगाएं और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई शुरू करें। इसके साथ ही, नागरिकों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया है, जिसमें कबूतरों को दाना डालने से होने वाले स्वास्थ्य खतरे और वैकल्पिक मानवीय उपायों की जानकारी दी जाएगी।
कबूतरों से जुड़ी स्वास्थ्य चिंताएं
स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में कबूतरों की बीट और पंखों का जमा होना गंभीर समस्या बन चुका है। डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियां, जैसे हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनिटिस, हो सकती हैं। कुछ मामलों में इससे स्थायी नुकसान की आशंका भी जताई गई है।
पहले से लागू हैं कुछ शहरों में नियम
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद मुंबई में इस तरह के नियामक नियम पहले से लागू हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भारतीय न्याय संहिता 2023 और संबंधित नगर निगम कानूनों का हवाला देते हुए कहा है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता की सुरक्षा के लिए ऐसे कदम उठाना कानूनी रूप से उचित है।





