Report: Arvind Chouhan
Gwalior news: संगीत नगरी ग्वालियर में विश्व प्रसिद्ध तानसेन संगीत समारोह 2025 की पारंपरिक और भावपूर्ण शुरुआत हो गई है। हजीरा स्थित तानसेन समाधि स्थल पर आयोजित इस समारोह के पहले दिन हरिकथा, मिलाद, शहनाई वादन और चादरपोशी के माध्यम से संगीत और सांस्कृतिक एकता का अनुपम दृश्य देखने को मिला। इस अवसर पर विभिन्न धर्मों के लोगों ने एक साथ मंच साझा कर आपसी सौहार्द और समरसता का संदेश दिया। देर शाम मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्चुअल माध्यम से जुड़कर इस पांच दिवसीय आयोजन का विधिवत शुभारंभ करेंगे।
15 से 19 दिसंबर तक चलेगा विश्व संगीत समागम
15 दिसंबर से 19 दिसंबर तक आयोजित होने वाले इस पांच दिवसीय तानसेन समारोह के दौरान ग्वालियर की फिजाएं शास्त्रीय संगीत की मधुर स्वर लहरियों से सराबोर रहेंगी। देश-विदेश से आए प्रख्यात कलाकार सुर सम्राट तानसेन को स्वरांजलि अर्पित करेंगे। इस वर्ष समारोह के लिए विशेष रूप से ग्वालियर के चतुर्भुज मंदिर की थीम पर भव्य मंच का निर्माण किया गया है, जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करता है।
परंपरागत विधियों से हुआ शुभारंभ
समारोह की शुरुआत परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार की गई। तानसेन समाधि स्थल पर धोलीबुआ महाराज द्वारा हरिकथा का वाचन किया गया। इसके पश्चात मुस्लिम धर्मगुरुओं ने मिलाद पढ़कर चादरपोशी की। इस दौरान पारंपरिक शहनाई वादन ने वातावरण को भक्तिमय और सुरमयी बना दिया। यह आयोजन न केवल संगीत का उत्सव है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक एकता और विविधता का सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।
संस्कृति मंत्री की सहभागिता, दिग्गज कलाकार करेंगे प्रस्तुति
शास्त्रीय संगीत के इस प्रतिष्ठित मंच पर मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री भी समारोह में सहभागिता करेंगे। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में देश और दुनिया के नामचीन शास्त्रीय संगीतज्ञ अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से संगीत सम्राट तानसेन को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
इन विभूतियों को मिलेगा सम्मान
इस वर्ष संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पं. राजा काले और पं. तरुण भट्टाचार्य को तानसेन अलंकरण से सम्मानित किया जाएगा। वहीं साधना परमार्थिक संस्थान समिति, मंडलेश्वर और रागायन संगीत समिति, ग्वालियर को राजा मानसिंह तोमर सम्मान प्रदान किया जाएगा।
संगीत, परंपरा और सौहार्द का संगम
तानसेन संगीत समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्वालियर की पहचान और गौरव का प्रतीक है। यह आयोजन संगीत, आध्यात्म और सामाजिक समरसता का ऐसा संगम है, जो हर वर्ष देश-विदेश के संगीत प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।





