भारत में पति-पत्नी का रिश्ता जन्मों-जन्मों का बंधन माना जाता है, लेकिन लावतिया में शादी का बंधन महिलाओं के लिए किसी सपने जैसे हो गया है। लावतिया यूरोप का छोटा-सा, बेहद खूबसूरत देश है। घने जंगल, शांत नदी किनारे बसे छोटे शहर, और त्योहारों की खुशबू से भरी हवा…लेकिन इसी खूबसूरती के बीच एक कड़वी सच्चाई धीरे-धीरे हर घर में दस्तक दे रही है।
“यहां पुरुष कम हैं… और मजबूरियां ज़्यादा।
लातविया में महिलाओं की संख्या पुरुषों से 15% अधिक है। यूरोपीय संघ के औसत से यह अंतर तीन गुना ज्यादा है। इसका असर सिर्फ जनसंख्या के आंकड़ों में नहीं, बल्कि रिश्तों, परिवारों और रोजमर्रा की जिंदगी पर खुलेआम दिखाई देने लगा है। डानिया फेस्टिवलों में काम करने वाली एक युवा महिला के चारों ओर हर तरफ महिलाएं ही महिलाएं है। वह हंसते हुए कहती है कि यहां जिन लड़कियों की ज़िंदगी में पुरुष हैं, उन्हें भाग्यशाली माना जाता है। उसकी दोस्त जेन बताती है, कि कई महिलाएं साथी की तलाश में विदेश जा रही हैं… लेकिन सभी के लिए यह आसान नहीं।

लातविया की हजारों महिलाएं आज एक अजीब-सी उलझन का सामना कर रही हैं, जिंदगी चलाने के लिए हाथ तो चाहिए, लेकिन हाथ पकड़ने वाला कोई नहीं है।
किराए पर पति: मजबूरी से जन्मी एक नई व्यवस्था
यही कारण है कि लातविया में अब एक अनोखा चलन तेजी से बढ़ रहा है, घंटों के हिसाब से ‘किराए के पति’। ये पति असली पति नहीं होते, बल्कि वे पुरुष होते हैं जिन्हें वेबसाइटें घर के छोटे-छोटे कामों के लिए भेजती हैं।
प्लंबिंग
बढ़ईगीरी
मरम्मत
टेलीविजन इंस्टॉलेशन
पेंटिंग
और घर की सामान्य देखभाल
Komand-24 और Remontdarbi जैसी वेबसाइटें महिलाओं को ‘हैंडमेन’ यानी ‘कार्यकारी पति’ उपलब्ध कराती हैं।
इन पुरुषों की भूमिकाएं सीमित हैं, लेकिन उनकी जरूरतें भावनात्मक रूप से बेहद गहरी हैं। यह सिर्फ काम की जरूरत नहीं…
यह उस खालीपन की भी कहानी है, जो समाज में पुरुषों की कमी ने पैदा किया है। सिर्फ लातविया नहीं, दुनिया भी यही कहानी कह रही है। किराए के पति का चलन केवल लातविया में ही नहीं बढ़ रहा। यूके में 2022 में लॉरा यंग ने ‘Rent My Handy Husband’ नाम से अपने पति को छोटे कामों के लिए किराए पर देना शुरू किया। यह मॉडल दिखाता है कि दुनिया के कई देशों में पारिवारिक ढांचे बदल रहे हैं और लोग अपनी जरूरतों के लिए नए रास्ते चुन रहे हैं।
एक सवाल जो दुनिया से पूछता है, क्या यह मजबूरी है या आधुनिक जीवन की सच्चाई?
लातविया की लड़कियां यह निर्णय खुशी से नहीं ले रहीं, वे बस हालातों से लड़ने की कोशिश कर रही हैं। जब घर परिवार की जिम्मेदारियां अकेली कंधों पर आ जाती हैं, तो जिंदगी को आगे बढ़ाने के लिए कोई-न-कोई सहारा चुनना ही पड़ता है। यह कहानी सिर्फ लातविया की नहीं…यह दुनिया भर में बदलते सामाजिक समीकरणों का आईना है। by: vijay nandan





