ऐशबाग थाना पुलिस की मनमानी पर अदालत सख्त, दो पुलिसकर्मियों पर 2 लाख रुपये हर्जाने का आदेश

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BY: Yoganand Shrivastva

भोपाल: एक महिला अधिवक्ता को ‘गुंडा’ करार देना ऐशबाग थाना पुलिस को भारी पड़ गया। कोर्ट ने इसे बेबुनियाद और मनमानी कार्रवाई मानते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी अजय नायर और एसआई गौरव पांडेय पर 2 लाख रुपये हर्जाना अदा करने का आदेश दिया है।

क्या है मामला?

पूर्व विधायक की बेटी और महिला अधिवक्ता वीणा गौतम ने पड़ोसियों से हुए विवाद की शिकायत ऐशबाग थाने में की थी। लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय उनके और उनके पति के खिलाफ काउंटर केस दर्ज कर दिया। यही नहीं, पुलिस ने दोनों को गुंडा सूची में शामिल करते हुए एसडीएम कोर्ट को यह कहते हुए रिपोर्ट भेजी कि वे आदतन अपराधी हैं और इलाके में खौफ फैलाते हैं, जिससे लोग शिकायत करने से डरते हैं।

एसडीएम ने पुलिस की रिपोर्ट को किया खारिज

एसडीएम नजूल शहर ने पुलिस द्वारा भेजे गए दस्तावेजों की जांच में पाया कि

  • पुलिस के आरोप तथ्यहीन थे,
  • किसी आपराधिक गतिविधि का रिकॉर्ड नहीं मिला,
  • कार्रवाई केवल आरोपों के आधार पर की गई थी।

इसके बाद एसडीएम ने पुलिस अधिकारियों को अधिवक्ता को हर्जाना देने का आदेश जारी किया।

हर्जाना न मिलने पर कोर्ट पहुंचीं पीड़िता

निर्धारित समय में हर्जाना न दिए जाने पर वीणा गौतम ने जिला न्यायालय में याचिका दायर की। व्यवहार न्यायाधीश हेमलता अहिरवार ने एसडीएम के आदेश को सही माना और पुलिस अधिकारियों को तुरंत 2 लाख रुपये अदा करने के निर्देश दिए। यह फैसला बताता है कि बिना ठोस आधार के किसी को गुंडा घोषित करना या झूठे आरोप लगाना पुलिस पर भारी पड़ सकता है और कानून ऐसी मनमानी पर कड़ी कार्रवाई करता है।

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