रिपोर्ट: दीपक अधिकारी
हल्द्वानी: अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अवसर पर सहकारिता विभाग द्वारा स्थानीय उत्पादों और महिला समूहों को प्रोत्साहित करने के लिए आयोजित सहकारिता मेला 2025 के दूसरे दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल एमबी इंटर कॉलेज मैदान पहुंचकर विभिन्न महिला स्व सहायता समूहों और सहकारी समितियों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया।
कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। सीएम धामी ने मंच से सहकारिता आधारित योजनाओं, डिजिटल पहल और सरकार की नई नीतियों के बारे में जनता को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि इस तरह के मेले का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों के लिए बाज़ार उपलब्ध कराना और महिला समूहों की आर्थिक सशक्तिकरण में सहकारिता को बढ़ावा देना है।

मुख्यमंत्री बोले — सहकारिता को जन-जन तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता
सीएम धामी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सहकारिता को बढ़ावा देने के लिए अलग मंत्रालय का गठन किया गया है। उसी दिशा में उत्तराखंड सरकार राज्यभर में सहकारिता को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि पूरे देश में बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण कार्य पहली बार देवभूमि उत्तराखंड में शुरू किया गया। राज्य की 671 सहकारी समितियों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है, जिससे किसान ऑनलाइन जुड़कर सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं।
सीएम ने जानकारी दी कि—
24 समितियां जन-औषधि केंद्र के रूप में कार्यरत हैं।
640 समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर की तरह विकसित किया गया है।
फरवरी 2023 से अब तक 800 नई टैक्स और मत्स्य समितियों का गठन किया गया है।
उन्होंने बताया कि पूर्व में मड़ुआ की खरीद कीमत 42.90 रु./किग्रा थी, जिसे बढ़ाकर इस वर्ष 48.86 रु./किग्रा कर दिया गया है।
इसके अलावा दीनदयाल किसान कल्याण योजना के माध्यम से किसानों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण दिया जा रहा है।
सीएम धामी ने कहा कि आज प्रदेश की 1 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। सहकारी बैंकों में लोगों का विश्वास बढ़ा है और वर्तमान में इन बैंकों में 16 हजार करोड़ से अधिक की जमा राशि है।





