कुरुक्षेत्र: गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर मंगलवार को कुरुक्षेत्र में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में एक बेहद भावुक एवं ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वयं श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सिर पर उठाकर मुख्य मंच तक ले जाने की पवित्र ‘पालकी सेवा’ निभाई। सिख धर्म में यह सेवा अत्यंत आदर, श्रद्धा और पूर्ण समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।

मुख्यमंत्री का यह कदम पंज प्यारों की अगुवाई में हुआ, और पूरे परिसर में “जो बोले सो निहाल… सत श्री अकाल!” की जयकारों से वातावरण गूंज उठा। उपस्थित संगत ने मुख्यमंत्री की विनम्रता और सेवा भाव का गर्मजोशी से स्वागत किया।
गुरु साहिब की हुजूरी में पवित्र 'पालकी सेवा’ निभाना मेरे लिए परम सौभाग्य की बात है।
— Nayab Saini (@NayabSainiBJP) November 25, 2025
आज कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर आयोजित श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी दिवस का यह पवित्र समागम हमें यह स्मरण कराता है कि मानवता की रक्षा और स्वधर्म के पालन के लिए हमें सदैव तत्पर रहना… pic.twitter.com/SgSVRLqGWU
गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान की स्मृति ताज़ा
मुख्यमंत्री सैनी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को आदर के साथ दरबार हॉल में पहुंचाया। इसके पश्चात, विधिवत अरदास कर के पावन स्वरूप का ‘प्रकाश’ (स्थापना) किया गया। पूरा परिसर श्रद्धा और शांति के वातावरण में डूबा रहा। इस दौरान उपस्थित लोगों को गुरु तेग बहादुर जी के उस अद्वितीय बलिदान की याद आई, जिसने धर्म, संस्कृति और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दी।
समारोह में आध्यात्मिक प्रस्तुतियों की झलक
राज्य स्तरीय कार्यक्रम में गुरु तेग बहादुर जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कीर्तन, गुरबाणी पाठ, समागम और उनके जीवन तथा सिद्धांतों पर आधारित विशेष प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों ने गुरु जी के सत्य, न्याय और सहिष्णुता के संदेश को नए सिरे से समाज तक पहुंचाया।
संदेश: सद्भाव और मानवता
मुख्यमंत्री द्वारा निभाई गई पालकी सेवा न केवल धार्मिक परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक रही, बल्कि इसने हरियाणा सरकार और सिख समुदाय के बीच आपसी सद्भाव और विश्वास को भी रेखांकित किया। इस दृश्य ने स्पष्ट किया कि गुरु तेग बहादुर जी का संदेश केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि मानवता के सार्वभौमिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है।





