BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में आज एक अहम विधेयक पेश किया गया। गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में 130वां संविधान संशोधन बिल 2025 प्रस्तुत किया, जिसके तहत यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री या राज्य मंत्री गिरफ्तार होते हैं तो उन्हें अपने पद से हटना अनिवार्य होगा। यही नियम केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर भी लागू होगा। इसके अलावा, गंभीर आपराधिक मामलों में हिरासत में लिए जाने की स्थिति में भी इस्तीफा देना पड़ेगा।
संसद में पेश हुए प्रमुख बिल
आज लोकसभा में कई अहम विधेयक चर्चा के लिए रखे गए, जिनमें शामिल हैं:
- 130वां संविधान संशोधन बिल 2025
- केंद्र शासित प्रदेश संशोधन बिल 2025
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025
- ऑनलाइन गेमिंग के प्रमोशन और रेगुलेशन से जुड़ा बिल 2025
इस्तीफा क्यों होगा जरूरी?
इस नए प्रस्तावित प्रावधान के पीछे सरकार की दलील है कि—
- जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से हो सके।
- पद का दुरुपयोग कर जांच एजेंसियों पर दबाव न बनाया जा सके।
- गवाहों को प्रभावित होने से रोका जा सके।
- सबूतों से छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट करने की कोशिश न हो।
हाल के घटनाक्रम से जुड़ा संदर्भ
यह संशोधन बिल हाल की राजनीतिक परिस्थितियों से भी जुड़ा माना जा रहा है।
- दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया था, लेकिन उन्होंने जेल में रहते हुए भी इस्तीफा नहीं दिया था।
- वहीं झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गिरफ्तारी के बाद स्वेच्छा से पद छोड़ दिया था।
- इसी तरह, दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी ED और CBI की कार्रवाई में हिरासत में लिए जा चुके हैं।
इन घटनाओं के बाद यह बहस तेज हो गई थी कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को गिरफ्तारी के बावजूद अपने पद पर बने रहने की अनुमति होनी चाहिए या नहीं। नए विधेयक के पास होने पर इस पर पूरी तरह विराम लग जाएगा और किसी भी मंत्री या मुख्यमंत्री को गिरफ्तारी की स्थिति में तत्काल इस्तीफा देना होगा।





