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चुनाव आयोग पर तेजस्वी यादव का विवादित बयान, NDA ने जताई कड़ी आपत्ति

चुनाव आयोग पर तेजस्वी यादव का विवादित बयान, NDA ने जताई कड़ी आपत्ति

बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक बयान देते हुए न केवल आलोचना की बल्कि आयोग के सूत्रों की तुलना ‘मूत्र’ से कर दी। उनके इस बयान से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है, और NDA गठबंधन ने इसे बौखलाहट करार दिया है।


क्या है पूरा मामला?

बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चल रहा है। इस प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग ने यह दावा किया है कि बिहार में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं।
इस जानकारी को आयोग ने सूत्रों के हवाले से मीडिया तक पहुंचाया।


तेजस्वी यादव का तीखा बयान

रविवार को पटना में विपक्षी गठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने कहा:

  • “चुनाव आयोग खुद सामने आने की बजाय सूत्रों के जरिये खबर प्लांट करवा रहा है।”
  • “ये वही सूत्र हैं जो ऑपरेशन सिंदूर में इस्लामाबाद, कराची और लाहौर पर कब्जा कर चुके थे। इसलिए हम ऐसे सूत्र को मूत्र समझते हैं।”

तेजस्वी का यह बयान बेहद विवादास्पद माना जा रहा है, और कई राजनीतिक दलों ने इसकी निंदा की है।


मतदाता सूची में विदेशी नामों पर विवाद

चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदाता सूची में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के नागरिकों के नाम शामिल हैं।
अधिकारियों का कहना है:

  • “पुनरीक्षण के दौरान हमने घर-घर जाकर जानकारी जुटाई है।”
  • “एक अगस्त से इन संदिग्ध नामों की जांच होगी।”
  • “30 सितंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम सूची में अवैध प्रवासियों के नाम हटाए जाएंगे।”

तेजस्वी ने क्या जताई चिंता?

तेजस्वी यादव ने आयोग के इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा:

  • “अगर 1% भी नाम कटे, तो नतीजों पर भारी असर पड़ेगा।”
  • “बिहार में करीब 7.96 करोड़ मतदाता हैं, 1% कटे तो हर विधानसभा में 3200 नाम हट जाएंगे।”

वह यह मानते हैं कि इस प्रक्रिया में गड़बड़ी से चुनाव निष्पक्ष नहीं रह जाएगा।


NDA का पलटवार

भाजपा, जेडीयू और एनडीए के अन्य घटक दलों ने तेजस्वी के बयान की आलोचना की।
उनका कहना है:

  • “तेजस्वी की भाषा लोकतांत्रिक गरिमा के खिलाफ है।”
  • “यह बयान बौखलाहट और जिम्मेदार विपक्ष की कमी को दर्शाता है।”

तेजस्वी यादव का विवादास्पद बयान बिहार की चुनावी राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।
जहां एक ओर विपक्ष मतदाता सूची को लेकर संदेह जता रहा है, वहीं चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को पारदर्शी बताने में जुटा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने आगामी चुनावों से पहले सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है।

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