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संसद के निचले सदन में स्वीकार हुआ ‘एक देश, एक चुनाव’ संशोधन बिल

One Country One Election introduced in Lok Sabha, know which party is opposing and which party is supporting

जानिए, कौनसी पार्टी कर रही विरोध और कौनसा दल कर रहा समर्थन

दिल्ली: कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा व विधानसभा चुनाव साथ साथ कराने के प्रावधान वाले ‘संविधान विधेयक 2024  और उससे जुड़े संघ राज्य क्षेत्र विधि संशोधन विधेयक  2024 को निचले सदन में पेश किया। लेकिन विपक्षी दल मोदी सरकार के इस विधेयक के विरोध में मुखर हैं। जानिए आखिर सदन में कौनसी पार्टियां वन नेशन वन इलेक्शन का विरोध कर रही हैं और कौनसी पार्टियां बिल का समर्थन कर रही हैं।

वन नेशन वन इलेक्शन विधेयक का विरोध करने वालों में भारतीय कांग्रेस पहले स्थान पर है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी भी विरोध कर रही है। पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी  टीएमसी भी इस बिल के खिलाफ है। वहीं आम आदमी पार्टी भी सबसे बड़ी विरोधी कतार में खड़ी है। विरोधी विपक्षी दलों में आरजेडी, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM, CIPIM और शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी एनसीपी भी इस बिल के कड़े विरोध में खड़ी हो गई है। वहीं बीजेपी के अलावा उसके सभी सहयोग गठबंधन, शिवसेना शिंदे, जेडीयू, टीडीपी, अपना दल, एलजेपी जैसी पार्टियां विधेयक का समर्थन कर रही हैं। 

समर्थन में ये पार्टियां

बीजेपी                                       

जेडीयू                                         

टीडीपी                                         

लोजपा                                       

अपना दल                                   

शिवसेना शिंदे                             

एनसीपी(अजीत पवार)             

विरोध में ये पार्टियां

कांग्रेस

समाजवादी पार्टी

तृणमूल कांग्रेस

एआईआईएम

आरजेडी

एनसीपी (शरद गुट)

क्या है वन नेशन वन इलेक्शन बिल

सत्तारूढ़ बीजेपी ने ‘एक देश, एक चुनाव’ के अपने मुख्य मुद्दे को लागू करने के लिए पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लोकसभा व विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के मसौदे के क्रियान्वयन के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक को मंजूरी दी थी। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के नेतृत्व वाली एक उच्चस्तरीय समिति ने लोकसभा व राज्य विधानसभाओं के चुनावों के साथ-साथ नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव कराने का भी प्रस्ताव दिया था। लेकिन मंत्रिमंडल ने फिलहाल स्थानीय निकाय चुनावों के मुद्दे से दूरी रखने का निर्णय किया है। बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र में इसका वादा किया था।