रिपोर्ट- देवेन्द्र श्रीवास
जांजगीर-चांपा। जिले के चांपा के पास बसे सिवनी गांव की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। यहां की महिलाएं हथकरघा से कॉटन कपड़े बुनकर अपनी आजीविका कमा रही हैं और समाज में नई पहचान हासिल कर रही हैं।
300 से अधिक महिलाएं जुड़ीं बुनकर समिति से
गांव में संचालित आदर्श बुनकर सहकारी समिति से 300 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं कपड़ों की बुनाई करके न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर भी बढ़ रही हैं।
अधिकारियों ने की सराहना
हाल ही में चांपा एसडीओपी यदुमणि सिदार सिवनी गांव पहुंचे। उन्होंने बुनकर महिलाओं के कार्य को करीब से देखा और उनकी मेहनत की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में यह पहल स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण है।
मास्टर ट्रेनर दे रहे तकनीकी मार्गदर्शन
समिति का संचालन गांव के ही मास्टर ट्रेनर मनमोहन देवांगन कर रहे हैं। वे महिलाओं को प्रशिक्षण देकर बेहतर बुनाई की तकनीक सिखाते हैं और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं।
राज्य हथकरघा संघ से जुड़ा विपणन नेटवर्क
समिति छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ से जुड़ी हुई है, जिसके माध्यम से तैयार कपड़ों को बाजार और ग्राहकों तक पहुँचाया जाता है। इससे महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने और स्थायी आमदनी पाने में मदद मिल रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रेरणा
सिवनी गांव की यह पहल आज अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन गई है। यहां की महिलाएं साबित कर रही हैं कि सामूहिक प्रयास, सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास के साथ गांवों में भी आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखी जा सकती है।





