BY: Yoganand Shrivastva
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में निवेश के नाम पर हुए बहुचर्चित वी-केयर मल्टीट्रेड प्राइवेट लिमिटेड घोटाले में एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। करीब 250 करोड़ रुपये की ठगी के आरोपी और लंबे समय से फरार चल रहे प्रेमप्रकाश सिंह को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) की टीम ने कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया है।
कंपनी के नाम पर बीमा योजना, असल में जालसाजी
यह पूरा घोटाला एक बहुराष्ट्रीय निजी कंपनी वी-केयर मल्टीट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर किया गया, जो 2008-09 में दिल्ली और हरियाणा में रजिस्टर्ड हुई थी। कंपनी ने लखनऊ के कृष्णानगर इलाके में अपना क्षेत्रीय कार्यालय खोला और लोगों को बीमा कराने और बेहतर रिटर्न का झांसा देकर करोड़ों रुपये निवेश के नाम पर इकट्ठा कर लिए।
ऑफिस बंद, संचालक फरार
जैसे ही भारी संख्या में लोगों की जमा पूंजी कंपनी के पास पहुंची, कुछ ही समय बाद इसके सभी कार्यालय बंद कर दिए गए और संचालक फरार हो गए। जब निवेशकों को अपने पैसे वापस नहीं मिले, तो मामले ने तूल पकड़ा और लखनऊ के कृष्णानगर और आशियाना थानों में कुल 26 मुकदमे दर्ज किए गए।
जांच का जिम्मा ईओडब्ल्यू को सौंपा गया
राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 3 नवंबर 2015 को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) को इसकी जांच सौंपी। ईओडब्ल्यू की तफ्तीश में सामने आया कि इस जालसाजी में कुल 23 लोग संलिप्त थे, जिनमें से 19 की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है और उनके खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
मुख्य आरोपी प्रेमप्रकाश सिंह की गिरफ्तारी
घोटाले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी प्रेमप्रकाश सिंह को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया है। वह झारखंड के रांची का निवासी है और लंबे समय से जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंक रहा था। आखिरकार EOW की क्रैक टीम ने तकनीकी सर्विलांस और लोकल इंटेलिजेंस की मदद से उसकी लोकेशन ट्रेस की और धरदबोचा।
डीजी नीरा रावत का बयान
ईओडब्ल्यू की डीजी नीरा रावत ने कहा कि इस घोटाले के सभी आरोपी जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यालय स्तर पर क्रैक टीम का गठन किया गया है जो आर्थिक अपराध के मामलों में फरार आरोपियों की धरपकड़ पर विशेष ध्यान दे रही है।
साथ ही, मामलों की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए विशेष समिति बनाई गई है। डीजी ने यह भी जानकारी दी कि जल्द ही विभाग में “रिवॉर्ड एंड पनिशमेंट पॉलिसी” लागू की जाएगी, जिसके तहत बेहतर जांच अधिकारियों और टीमों को हर महीने पुरस्कृत किया जाएगा।





