BY: Yoganand Shrivastva
एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जिसमें सांप के काटने से एक महिला की मौत के बाद उसके परिजनों ने तांत्रिक बाबा के कहने पर उसे गाय के गोबर में दफना दिया। बाबा का दावा था कि महिला रात 8 बजे तक जीवित होकर खुद बाहर निकल आएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और जब तक होश आया, तब तक काफी देर हो चुकी थी।
क्या है पूरा मामला?
घटना एक ग्रामीण इलाके की है, जहां 40 वर्षीय महिला को सांप ने डस लिया। परिजन उसे अस्पताल ले जाने की बजाय पास के एक स्वयंभू तांत्रिक के पास ले गए। बाबा ने बिना किसी जांच के ही घोषणा कर दी कि महिला मरी नहीं है बल्कि ‘सर्पदेव की कृपा’ से बेहोश है और उसे विशेष तांत्रिक प्रक्रिया से वापस लाया जा सकता है।
गोबर में दफन करने की तांत्रिक सलाह
बाबा ने परिजनों से कहा कि महिला को गाय के ताजे गोबर में पूरी तरह ढंककर जमीन में दबा दो, और रात 8 बजे तक इंतजार करो। उसके मुताबिक, वह महिला ‘सांप की पूजा’ के प्रभाव से बाहर आएगी और अपने आप गोबर से बाहर निकलकर जिंदा हो जाएगी। बाबा की बातों पर भरोसा कर परिजनों ने गंभीर हालत में पड़ी महिला को गोबर में दबा दिया।
रात 8 बजे हुआ सन्नाटा
परिवार और गांव के लोग पूरे दिन इस आशा में बैठे रहे कि महिला जीवित हो जाएगी, लेकिन रात 8 बजते ही जब कोई हलचल नहीं हुई, तब जाकर लोगों को शक हुआ। गोबर हटाकर जब महिला को बाहर निकाला गया, तब तक उसकी शव अवस्था पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी थी।
पुलिस और प्रशासन हरकत में
मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और महिला के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। साथ ही तांत्रिक बाबा की तलाश भी शुरू कर दी गई है, जो घटना के बाद मौके से फरार हो गया।
अंधविश्वास की कीमत एक जिंदगी
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में फैले अंधविश्वास और झोलाछाप तंत्र-मंत्र पर भरोसे की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है। यदि महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया होता, तो शायद उसकी जान बच सकती थी।
सांप के काटने जैसी गंभीर स्थिति में तांत्रिकों और बाबाओं के भरोसे रहने की कीमत इस महिला को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि अंधविश्वास कब तक लोगों की जान लेता रहेगा, और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता कब तक नहीं पहुंचेगी।
सांप काटे तो तुरंत अस्पताल जाएं, न कि तांत्रिकों के पास। सही समय पर इलाज ही जीवन बचा सकता है।





