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बॉलीवुड का काला सच: कास्टिंग काउच की चपेट में लड़कियां ही नहीं, लड़के भी”

BY: Yoganand Shrivastva

बॉलीवुड की चकाचौंध के पीछे एक ऐसा अंधेरा है, जो ग्लैमर की रोशनी में अक्सर छिपा रह जाता है। यह अंधेरा है कास्टिंग काउच का – एक ऐसा कड़वा सच जो न केवल लड़कियों, बल्कि लड़कों को भी अपने जाल में फंसाता है।

क्या है कास्टिंग काउच?

कास्टिंग काउच उस स्थिति को कहते हैं, जब किसी कलाकार से फिल्म या प्रोजेक्ट में काम देने के बदले यौन संबंध बनाने की मांग की जाती है। यह एक अमानवीय और गैरकानूनी व्यवहार है, जो कलाकारों की मजबूरी और सपनों का फायदा उठाता है।

यह शब्द प्रतीकात्मक रूप से उस “सोफे” को दर्शाता है, जो प्रोड्यूसर या डायरेक्टर के ऑफिस में रखा होता है – जहां ऑडिशन के बहाने शोषण शुरू होता है।


कब और कहां से शुरू हुआ यह चलन?

इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले 1930 के दशक में हॉलीवुड में किया गया। उस दौर में भी निर्माता और निर्देशक एक्ट्रेसेस से रोल के बदले “फेवर” मांगते थे। कई नामी अभिनेत्रियों जैसे जूडी गारलैंड, शिर्ले टेम्पल और मर्लिन मुनरो ने इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया।

भारत में पहली बार कास्टिंग काउच पर चर्चा 1990 के दशक में फिल्मी पत्रिकाओं में देखने को मिली। हालांकि किसी कलाकार ने तब खुलकर कुछ नहीं कहा।

पहला खुला खुलासा

साल 2003 में तमिल एक्ट्रेस शेरिन ने एक टीवी इंटरव्यू में दावा किया कि उनसे फिल्म में रोल के बदले समझौते की डिमांड की गई थी। इसके बाद 2005 में बॉलीवुड अभिनेत्री कोयना मित्रा ने भी इसी तरह का अनुभव साझा किया।


किसे बनते हैं शिकार?

फिल्म इंडस्ट्री में बाहर से आने वाली लड़कियां सबसे ज्यादा इस शोषण का शिकार बनती हैं। लेकिन अब लड़कों को भी इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। कई कास्टिंग डायरेक्टर्स और फिल्ममेकर्स इस सोच में जकड़े हुए हैं कि कलाकार कोई भी समझौता करने को तैयार होंगे, सिर्फ एक मौके के लिए।


एक्ट्रेस रोजलीन खान का अनुभव

रोजलीन बताती हैं – “2019 में मैं एक डायरेक्टर से मिलने गई थी। उसने साफ कहा कि लीड रोल चाहिए तो बेडरूम में चलो। मैं वहां से निकल गई और पुलिस में शिकायत करने वाली थी, लेकिन एक दोस्त ने कहा कि ऐसा करने से करियर खत्म हो सकता है। ऐसी घटनाएं मेरे साथ कई बार हुई हैं।”

उन्होंने कहा – “यहां बहुत सारी लड़कियां मजबूरी में समझौता करती हैं। मुंबई जैसे शहर में काम न मिले तो रहना मुश्किल हो जाता है।”


संचिता सरकार की आपबीती

मॉडल और अभिनेत्री संचिता सरकार ने भी कास्टिंग काउच के बारे में बताया – “रात के 12 बजे डायरेक्टर घर बुलाते हैं। कहते हैं कि पहले मिलो, फिर काम की बात करेंगे। अगर आप ‘ना’ कहो तो कहते हैं कि ‘फिर काम भूल जाओ’। मैंने कई प्रोजेक्ट सिर्फ इसलिए गंवा दिए क्योंकि मैंने समझौता करने से इनकार कर दिया।”


एक साल में 50 फिल्ममेकर्स पर यौन उत्पीड़न के आरोप

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में 50 से ज्यादा डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स पर रेप या यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। हालांकि अधिकतर केस या तो दबा दिए गए या कानूनी उलझनों में उलझकर बंद हो गए।


कास्टिंग काउच रोकने के प्रयास

  • धड़क कामगार यूनियन के अध्यक्ष अभिजीत राणे कहते हैं, “हमने फिल्म यूनियन से आग्रह किया है कि कास्टिंग में ट्रांसपेरेंसी लाई जाए।”
  • डॉ. सैयदा रुखशेदा, जो एक साइकेट्रिस्ट हैं, कहती हैं – “कास्टिंग काउच शिकार के मानसिक स्वास्थ्य को पूरी तरह से बर्बाद कर देता है।”
  • वकील काशिफ अली खान देशमुख कहते हैं – “अगर कोई व्यक्ति जबरन संबंध के लिए मजबूर करता है, तो यह सीधे तौर पर आईपीसी की धारा 375 और 376 के तहत दंडनीय अपराध है। FIR दर्ज होनी चाहिए।”

फिल्म इंडस्ट्री में काम पाने की चाह में कई युवा कलाकार शोषण के शिकार बनते हैं। कास्टिंग काउच केवल एक गंदा ऑफर नहीं, बल्कि एक मानसिक और भावनात्मक हमला है। जब तक कलाकारों को सुरक्षित माहौल और सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक बॉलीवुड की यह चकाचौंध अधूरी ही रहेगी।

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