Sunil Lahri: रामानंद सागर की चर्चित टीवी सीरीज ‘रामायण’ में लक्ष्मण का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता सुनील लहरी ने जेनरेशन जेड और आने वाली पीढ़ियों को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘Gen Z’ और ‘Gen Alpha’ जैसे शब्द भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़े नहीं हैं।
सुनील लहरी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने भारतीय सभ्यता, संस्कृति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर बात की। उनका कहना है कि नई पीढ़ी को ऐसे संबोधन दिए जाने चाहिए, जो उन्हें पिछली पीढ़ियों से जोड़ें, न कि उनके बीच दूरी पैदा करें।
Sunil Lahri: Gen Z और Gen Alpha नामों पर सुनील लहरी ने उठाए सवाल
सुनील लहरी ने वीडियो में कहा कि आज की पीढ़ी को Gen Z और Gen Alpha जैसे नामों से संबोधित किया जा रहा है। उनके मुताबिक, ऐसे शब्द भारतीय संस्कृति की पहचान नहीं हैं और इस तरह की शब्दावली आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से दूर कर सकती है।
जेन-जी, जेन अल्फा जैसे शब्द हमारी संस्कृति नहीं है उचित शब्दों का चयन ही आधुनिकता है हमारे भारतीय संस्कारों को बचाने के लिए गुरुकुल पद्धति पथक्रम जरूरी है
— Sunil lahri (@LahriSunil) August 13, 2026
Words like Gen-ji,Gen Alpha r not our culture. Selection of proper words is modernity. Gurukul style education is necessary.. pic.twitter.com/5OIZCbF6Ag
अभिनेता ने इस बात पर जोर दिया कि नई पीढ़ी के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल होना चाहिए, जिनसे उनके और समाज की पिछली पीढ़ियों के बीच जुड़ाव मजबूत हो। उन्होंने भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत बताई।
Sunil Lahri: ‘भारतीय सभ्यता और संस्कृति दुनिया की सबसे पुरानी’
सुनील लहरी ने भारतीय सभ्यता और संस्कृति की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा बेहद समृद्ध और पुरानी है। उनका मानना है कि नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी परंपराओं और संस्कारों से भी परिचित कराया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों में आदर, सम्मान और संस्कार की भावना विकसित करने के लिए शिक्षा के स्तर पर भी बदलाव किए जा सकते हैं।
Sunil Lahri: स्कूलों में गुरुकुल पाठ्यक्रम शामिल करने की वकालत
सुनील लहरी ने स्कूलों में गुरुकुल पद्धति के कुछ पहलुओं को शामिल करने की बात भी कही। उनके मुताबिक, गुरुकुल आधारित शिक्षा में केवल किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि अनुशासन, सम्मान और व्यवहार से जुड़े मूल्यों पर भी जोर दिया जाता था।
अभिनेता का कहना है कि अगर शिक्षा व्यवस्था में ऐसे मूल्यों को जगह दी जाए, तो बच्चों को अपनी संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने में मदद मिल सकती है। उन्होंने इस दिशा में विचार करने की जरूरत बताई।
Sunil Lahri: ‘रामायण’ में लक्ष्मण बनकर लोकप्रिय हुए सुनील लहरी
सुनील लहरी को सबसे ज्यादा लोकप्रियता 1987 में प्रसारित रामानंद सागर की ‘रामायण’ से मिली। इस ऐतिहासिक टीवी शो में उन्होंने लक्ष्मण की भूमिका निभाई थी। अरुण गोविल ने भगवान राम और दीपिका चिखलिया ने माता सीता का किरदार निभाया था।
‘रामायण’ ने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में अलग पहचान बनाई और इसके कलाकारों के किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए। सुनील लहरी आज भी लक्ष्मण के किरदार के लिए पहचाने जाते हैं।
Sunil Lahri: रणबीर कपूर की ‘रामायण’ पर भी रख चुके हैं राय
सुनील लहरी आने वाली फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी अपनी राय रख चुके हैं। इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आने वाले हैं, जबकि रवि दुबे लक्ष्मण का किरदार निभा रहे हैं।
फिल्म से जुड़े शुरुआती विजुअल और ट्रेलर सामने आने के बाद सुनील लहरी ने रणबीर कपूर के लुक और उनके किरदार को लेकर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने माना कि रणबीर के लिए भगवान राम की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि दर्शक उन्हें उनकी पिछली फिल्मों के किरदारों से जोड़कर देखते हैं।
Sunil Lahri: ‘रणबीर लक्ष्मण के किरदार में ज्यादा फिट लगते’
सुनील लहरी ने यह भी कहा था कि रणबीर कपूर को भगवान राम के बजाय लक्ष्मण या भरत जैसे किरदारों में देखना उन्हें ज्यादा स्वाभाविक लगता। उनका तर्क था कि किसी अभिनेता की पिछली फिल्मों से बनी छवि को दर्शकों के मन से हटाना आसान नहीं होता।
उनके मुताबिक, भगवान राम जैसे धार्मिक और आदर्श चरित्र के लिए दर्शकों के मन में अभिनेता की छवि भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी वजह से ऐसे किरदारों के लिए नए चेहरों को मौका देने का विचार भी उन्होंने सामने रखा था।
Sunil Lahri: नई पीढ़ी और संस्कृति को लेकर लगातार मुखर हैं सुनील लहरी
सुनील लहरी समय-समय पर सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर अपनी राय सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करते रहे हैं। इस बार उन्होंने Gen Z और Gen Alpha जैसे शब्दों से लेकर शिक्षा और गुरुकुल परंपरा तक कई विषयों को एक साथ उठाया।
उनकी हालिया टिप्पणी ने नई पीढ़ी की पहचान, भारतीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर चर्चा छेड़ दी है।
read also; इमरान हाशमी की फिल्म Awarapan 2 की जबरदस्त एडवांस बुकिंग, सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ पीछे



