एलोन मस्क की कंपनी स्टारलिंक अब भारत में यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) के साथ मिलकर काम करेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने बुधवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की।
UIDAI ने स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड को सब-ऑथेंटिकेशन यूजर एजेंसी के रूप में मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि स्टारलिंक भारत में अपने ग्राहकों की पहचान के लिए आधार आधारित ऑथेंटिकेशन का उपयोग करेगा।
कस्टमर वेरिफिकेशन अब होगा तेज और सुरक्षित
इस नई साझेदारी से स्टारलिंक के लिए ग्राहक वेरिफिकेशन प्रक्रिया फास्ट, सुरक्षित और आसान बन जाएगी। इससे KYC (नो योर कस्टमर) नियमों का पालन भी सरल हो जाएगा।
फायदे:
- आधार आधारित ऑथेंटिकेशन के जरिए तेज वेरिफिकेशन
- सुरक्षित डेटा प्रोसेसिंग
- सरल और भरोसेमंद ग्राहक KYC
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट के लिए लाइसेंस और अप्रूवल
- जून 2025 में स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट ऑपरेट करने के लिए टेलीकॉम डिपार्टमेंट का लाइसेंस मिल चुका है।
- अब कंपनी को सिर्फ IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorization Center) से अप्रूवल का इंतजार है।
- IN-SPACe अप्रूवल मिलने के बाद, भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस पूरी तरह से लॉन्च हो सकेगी।
स्टारलिंक की भारत में योजना
स्टारलिंक की यह पहल ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। UIDAI के साथ साझेदारी से, कंपनी भारत में अपने कस्टमर बेस को तेजी से और सुरक्षित तरीके से बढ़ा सकेगी।





