रूसी सैटेलाइट का खतरा मंडरा रहा है धरती पर, कब और कहां गिरेगा ?

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Soviet Satellite May Crash to Earth Next Week

क्या कोसमोस 482 बनेगा तबाही की वजह? जानें वैज्ञानिकों की राय

BY: VIJAY NANDAN, EDITOR DIGITAL

एक पुराना सोवियत उपग्रह, जो बीते पांच दशकों से पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहा है, अब बेकाबू होकर अगले हफ्ते धरती पर गिर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह उपग्रह किसी आबादी वाले क्षेत्र में भी गिर सकता है।

क्या है कोसमोस 482 मिशन?

मार्च 1972 में सोवियत संघ ने कोसमोस 482 नामक एक मिशन लॉन्च किया था, जिसमें एक यान शुक्र ग्रह की ओर भेजा जाना था। लेकिन तकनीकी खराबी के चलते यह यान पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण सीमा से बाहर नहीं निकल सका और पृथ्वी की निचली कक्षा में ही फंस गया।

इस मिशन का मुख्य भाग 1981 में धरती पर गिरा और संभवतः वायुमंडल में जलकर नष्ट हो गया। लेकिन उसका कैप्सूल, जो उच्च कक्षा में चला गया था, अभी तक अंतरिक्ष में बना हुआ है और अब धीरे-धीरे पृथ्वी की ओर लौट रहा है।

टकराने की कितनी है संभावना?

ब्रिटिश-अमेरिकी खगोलशास्त्री जोनाथन मैकडॉवेल का मानना है कि यह कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने के बाद जलने की बजाय धरती की सतह तक पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि अगर ऐसा हुआ, तो इसके किसी व्यक्ति से टकराने की संभावना लगभग 1 इन 10,000 होगी।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इससे कोई परमाणु खतरा नहीं है क्योंकि इसमें कोई रेडियोधर्मी सामग्री मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा, “यह कोई बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन आप नहीं चाहेंगे कि यह आपके सिर पर गिरे।”

कहां और कब गिरेगा यह कैप्सूल?

डच खगोलविद मार्को लैंगब्रुक का अनुमान है कि कोसमोस 482 का पुनःप्रवेश 7 मई से 13 मई के बीच हो सकता है, संभवतः 9 या 10 मई को। यह किसी भी स्थान पर गिर सकता है जो 52 डिग्री उत्तर से 52 डिग्री दक्षिण अक्षांश के बीच आता है — यानी यूरोप, एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और दोनों अमरीकी महाद्वीपों के अधिकांश हिस्सों पर इसकी संभावना है।

क्या यह सुरक्षित रूप से जलेगा?

यह कैप्सूल शुक्र ग्रह तक पहुंचने के लिए डिज़ाइन किया गया था, इसलिए इसमें एक शक्तिशाली हीट शील्ड लगी हुई है जो इसे जलने से बचा सकती है। इसके साथ एक पैराशूट प्रणाली भी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इतने सालों बाद उसका काम करना असंभव है।

मैकडॉवेल का कहना है कि यह वस्तु लगभग 17,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से वायुमंडल में प्रवेश करेगी और फिर यह ‘फायरबॉल’ बनते हुए नीचे गिरेगी। अंत में यह एक कार के समान 100 से 200 मील प्रति घंटे की रफ्तार से धरती पर गिरेगी।

घबराने की नहीं है जरूरत

मैकडॉवेल ने स्पष्ट किया कि भले ही यह सैटेलाइट धरती पर गिरे, इससे किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचने की संभावना बेहद कम है — लगभग 1 इन 10 अरब। क्योंकि धरती का अधिकांश हिस्सा निर्जन है।

स्पेस जंक से बढ़ रहा है खतरा

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के अनुसार, कोसमोस 482 जैसे लगभग 3,000 निष्क्रिय उपग्रह धरती की कक्षा में घूम रहे हैं। कुल मिलाकर 170 मिलियन से अधिक टुकड़े — जिनमें निष्क्रिय उपग्रह, रॉकेट के हिस्से और पेंट के कण शामिल हैं — पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगा रहे हैं।

हाल के वर्षों में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जब अंतरिक्ष कचरा धरती पर गिरा है। 2019 में एक सैमसंग उपग्रह अमेरिका के मिशिगन राज्य में एक घर के पिछवाड़े गिरा था। पिछले साल केन्या में एक गांव में रॉकेट के अवशेष गिरे, लेकिन किसी को चोट नहीं लगी। हालांकि कोसमोस 482 का पुनःप्रवेश ध्यान आकर्षित कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे डरने की कोई जरूरत नहीं है। इसकी टक्कर की संभावना बहुत ही कम है, और ऐसे ज्यादातर उपग्रह जलकर नष्ट हो जाते हैं। फिर भी, यह घटना दुनिया को अंतरिक्ष में बढ़ती ‘स्पेस जंक’ की समस्या पर गंभीरता से सोचने को मजबूर कर रही है।

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