BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली, बॉलीवुड में एक और स्टारकिड की एंट्री भले ही चर्चा का विषय बनी हो, लेकिन शनाया कपूर का डेब्यू दर्शकों के दिल में खास जगह नहीं बना पाया। संजय कपूर और महीप कपूर की बेटी शनाया कपूर की पहली फिल्म ‘आंखों की गुस्ताखियां’ को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुए तीन दिन हो चुके हैं, और शुरुआती आंकड़ों से साफ है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फीकी रही है।
शनाया के साथ फिल्म में मुख्य भूमिका में नजर आए हैं विक्रांत मैसी, जो अपने दमदार अभिनय के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, इस बार उनकी लोकप्रियता भी फिल्म को बचा नहीं सकी।
तीन दिन में सिर्फ 1.2 करोड़ की कमाई
बॉक्स ऑफिस ट्रैकिंग साइट सैकनिल्क के अनुमान के अनुसार, फिल्म ने अपने ओपनिंग डे यानी शुक्रवार को केवल 30 लाख रुपये की कमाई की। शनिवार को थोड़ी उछाल जरूर देखने को मिली और फिल्म ने 49 लाख रुपये का बिजनेस किया। रविवार को फिल्म ने 41 लाख रुपये कमाए, जिससे पहले वीकेंड का कुल आंकड़ा 1.2 करोड़ रुपये तक पहुंचा।
यह आंकड़ा एक बड़ी स्टारकिड की डेब्यू फिल्म के लिए काफी निराशाजनक है, खासकर जब बॉलीवुड में सोशल मीडिया प्रमोशन और स्टार पावर पर खूब जोर दिया जाता है।
कम ऑक्यूपेंसी और कमजोर प्रतिक्रिया
रविवार को फिल्म की थिएटर ऑक्यूपेंसी महज 17.11 प्रतिशत रही, जबकि शनिवार को यह 15.25 प्रतिशत थी। इसका सीधा संकेत है कि दर्शकों की रुचि फिल्म में कम रही।
फिल्म समीक्षकों और दर्शकों दोनों की तरफ से फिल्म को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। कई दर्शकों ने फिल्म की स्क्रीनप्ले और इमोशनल कनेक्ट की कमी की बात की, वहीं शनाया के अभिनय को लेकर भी सोशल मीडिया पर मिश्रित राय सामने आई।
फिल्म की पृष्ठभूमि और उम्मीदें
‘आंखों की गुस्ताखियां’ की कहानी मशहूर लेखक रस्किन बॉन्ड की लोकप्रिय लघुकथा ‘The Eyes Have It’ से प्रेरित है। यह एक रोमांटिक-ड्रामा फिल्म है, जिसे संतोष सिंह ने निर्देशित किया है और मानसी बागला व वरुण बागला ने प्रोड्यूस किया है।
इस फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखने वाली शनाया कपूर को लेकर पहले से ही खूब उम्मीदें थीं। पहले उनकी फिल्म ‘बेधड़क’ से डेब्यू की खबर थी, लेकिन वह प्रोजेक्ट बंद हो गया। इसके बाद ‘आंखों की गुस्ताखियां’ को उनकी डेब्यू फिल्म बनाया गया।
शनाया-विक्रांत की जोड़ी नहीं बटोर पाई तालियां
फिल्म में विक्रांत मैसी जैसे अनुभवी अभिनेता के साथ शनाया को कास्ट किया गया था ताकि उन्हें एक ठोस शुरुआत मिल सके। लेकिन दर्शकों को दोनों की केमिस्ट्री खास पसंद नहीं आई। फिल्म की रफ्तार, संवाद और भावनात्मक गहराई भी कुछ जगहों पर कमजोर दिखी।
फिल्म के कई दृश्य आर्ट-हाउस शैली में दिखाए गए थे, जिससे मेनस्ट्रीम दर्शकों को जुड़ने में दिक्कत हुई। कई दर्शकों ने कहा कि फिल्म में ‘भावना तो थी, लेकिन पकड़ नहीं थी।’
क्या शनाया के करियर की शुरुआत खतरे में है?
यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि शनाया का करियर ठप्प हो गया है, लेकिन इतना तय है कि उन्हें आगे बेहद सोच-समझकर प्रोजेक्ट चुनने होंगे। सोशल मीडिया पर आलोचकों ने इसे ‘स्टारकिड प्रिविलेज की एक और नाकाम कोशिश’ करार दिया है, तो कई फैन्स ने उनके आत्मविश्वास और स्क्रीन प्रजेंस की तारीफ भी की।
विक्रांत मैसी के लिए भी चुनौती
विक्रांत मैसी का यह साल भी बॉक्स ऑफिस के लिहाज से कुछ खास नहीं रहा है। ‘आंखों की गुस्ताखियां’ से पहले उनकी कुछ फिल्में ओटीटी पर सराही गईं, लेकिन थियेटर में उन्हें वो सफलता नहीं मिल पा रही है।
हालांकि, विक्रांत की परफॉर्मेंस को लेकर आलोचक अभी भी सकारात्मक हैं। उनका अभिनय संतुलित और गंभीर रहा, लेकिन स्क्रिप्ट और निर्देशन ने उनकी प्रतिभा का पूरी तरह उपयोग नहीं किया।
क्या OTT पर मिलेगी नई जान?
कुछ ट्रेड एनालिस्ट मान रहे हैं कि ‘आंखों की गुस्ताखियां’ को यदि जल्दी ओटीटी पर रिलीज़ किया जाए, तो वहां इसे एक नई ऑडियंस मिल सकती है। क्योंकि फिल्म की कहानी उन लोगों के लिए दिलचस्प हो सकती है जो रस्किन बॉन्ड की कहानियों के फैन हैं या लाइट रोमांटिक ड्रामा पसंद करते हैं।





