Isa Ahmad
Rural Education Crisis: जर्जर स्कूल भवन, घोटुल और पेड़ के नीचे लगती है कक्षा
Rural Education Crisis: कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत सीतराम के आश्रित ग्राम राजामुंडा में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। शिक्षा विभाग जहां बेहतर शिक्षा व्यवस्था के दावे करता है, वहीं हकीकत यह है कि यहां के छात्र वर्षों से बिना स्कूल भवन के पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
राजामुंडा का प्राथमिक शाला भवन कई साल पहले जर्जर हो चुका है। हालत यह है कि स्कूल में छत तक नहीं है। ऐसे में बच्चे कभी घोटुल के झोपड़े में तो कभी खुले आसमान के नीचे पेड़ की छांव में पढ़ाई करते हैं। स्कूल में पहली से पांचवीं तक कुल 11 छात्र दर्ज हैं, जिनके लिए दो शासकीय शिक्षक नियुक्त किए गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, शिक्षक नियमित रूप से स्कूल नहीं आते। स्वदेश न्यूज़ की टीम के पहुंचने पर गांव में न स्कूल खुला मिला और न ही बच्चे। बताया गया कि भवन की स्थिति खराब होने के कारण बच्चे खुले में पढ़ाई करते हैं।
Rural Education Crisis: शराब के नशे में पहुंचता है शिक्षक, ABCD तक नहीं जानता पांचवीं का छात्र
Rural Education Crisis: ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नियुक्त शिक्षकों में से एक, लम्बोदर सिंह ठाकुर, अक्सर नशे की हालत में स्कूल पहुंचते हैं। कई बार वे बच्चों को पढ़ाने के बजाय गांव में शराब की तलाश में निकल जाते हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र को ABCD तक नहीं आती।
क्षेत्र बेहद अंदरूनी होने के कारण अधिकारियों की नियमित जांच नहीं होती और संकुल समन्वयक द्वारा भी निरंतर मॉनिटरिंग नहीं की जाती। यही वजह है कि शिक्षक मनमर्जी से अनुपस्थित रहते हैं।
इसी तरह कोपिनगुंडा और आलदण्ड स्कूलों में भी दो-दो शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन निरीक्षण के दौरान वहां भी शिक्षक अनुपस्थित पाए गए।
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Rural Education Crisis: इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी ने जांच कराने और दोषी शिक्षकों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि कब तक इन बच्चों को पक्का स्कूल भवन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाती है, और कब विभाग ऐसे लापरवाह व शराबी शिक्षकों पर सख्त कदम उठाता है।





