Reporter: Avinash Shrivastava, Edit By: Mohit Jain
Rohtas Love Marriage: “ये इश्क नहीं है इतना आसान, एक आग का दरिया है और डूब कर जाना है” – किसी शायर की ये पंक्तियाँ रोहतास ज़िले की इस प्रेम कहानी पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। परिवार और समाज की बंदिशों को चुनौती देते हुए नीतीश और स्नेहा ने अपने प्यार को नाम देकर एक नई ज़िंदगी की शुरुआत की है।
Rohtas Love Marriage: छत्तीसगढ़ से शुरू हुई चार साल पुरानी प्रेम कहानी
बताया जाता है कि देव पड़सर की रहने वाली स्नेहा और रोहतास निवासी नीतीश की मुलाकात चार साल पहले छत्तीसगढ़ में हुई थी। उस समय दोनों एक निजी अस्पताल में कार्यरत थे। साथ काम करते-करते दोनों के बीच नज़दीकियाँ बढ़ीं और धीरे-धीरे यह रिश्ता गहरे प्रेम में बदल गया।

घरवालों ने तय कर दी स्नेहा की शादी
दोनों पहले ही शादी का फैसला कर चुके थे, लेकिन इसी बीच स्नेहा के परिजनों ने उसकी शादी किसी अन्य युवक से तय कर दी। इस फैसले से स्नेहा मानसिक रूप से टूट गई, लेकिन उसने अपने प्यार से पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया।
मंदिर में रचाया विवाह, ईश्वर को बनाया साक्षी
परिस्थितियों से हार मानने के बजाय स्नेहा ने साहसिक कदम उठाया और अपने प्रेमी नीतीश का हाथ थाम लिया। दोनों डेहरी के समीप स्थित एक मंदिर पहुँचे, जहाँ उन्होंने ईश्वर को साक्षी मानकर एक-दूसरे की मांग में सिंदूर भरते हुए सात जन्मों तक साथ निभाने का संकल्प लिया। मंदिर के पुजारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विवाह संपन्न कराया।

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Rohtas Love Marriage: समाज की बंदिशों को दी चुनौती
परिवार की रज़ामंदी के बिना शादी कर नीतीश और स्नेहा ने समाज की रूढ़ियों को चुनौती दी है। दोनों का कहना है कि वे एक-दूसरे के साथ खुश हैं और सम्मानपूर्वक जीवन बिताना चाहते हैं।
यह प्रेम कहानी न सिर्फ साहस की मिसाल है, बल्कि उन युवाओं के लिए भी संदेश है जो सच्चे प्यार के लिए संघर्ष करने का हौसला रखते हैं।





