रिपोर्ट: शैलेंद्र पारे
Ratlam मंगलवार को रतलाम कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक शख्स किसी वाहन के बजाय सीधे घोड़े पर सवार होकर अपनी समस्या सुनाने पहुंच गया। कलेक्ट्रेट परिसर में घोड़े की टापों की गूंज सुनते ही अधिकारी, कर्मचारी और वहां मौजूद आम लोग दंग रह गए। इस अनूठे प्रदर्शन के पीछे का मकसद लुप्त होती चारागाह भूमि की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना था।
Ratlam पशुओं के हक के लिए ‘घुड़सवारी’ वाला प्रदर्शन
फरियादी का कहना है कि उसने घोड़े पर सवार होकर आने का फैसला इसलिए किया ताकि वह बेजुबान जानवरों की तकलीफ को सांकेतिक रूप से दर्शा सके। उसका तर्क है कि रतलाम जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पहले हर गांव में जीव-जंतुओं और पशुओं के लिए पर्याप्त सरकारी चारागाह भूमि उपलब्ध होती थी। लेकिन वर्तमान में यह जमीनें केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं, जिससे पशुओं के सामने जीवन का संकट खड़ा हो गया है।
Ratlam अवैध कब्जों ने छीना बेजुबानों का निवाला
ज्ञापन में इस बात पर चिंता जताई गई कि गांवों की सरकारी चारागाह जमीनों पर रसूखदारों ने अवैध कब्जे कर लिए हैं। कहीं इन जमीनों को जोतकर खेतों में तब्दील कर दिया गया है, तो कहीं पक्के मकान और अन्य व्यावसायिक निर्माण खड़े हो गए हैं। नतीजा यह है कि गाय, बैल और बकरियों के पास चरने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है और वे भोजन की तलाश में सड़कों पर आने को मजबूर हैं, जिससे आए दिन हादसे हो रहे हैं।
Ratlam प्रशासन से ठोस कार्रवाई की अपील
घोड़े पर सवार होकर पहुंचे इस शख्स ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि जिले के समस्त गांवों में राजस्व विभाग के माध्यम से चारागाह भूमि का सीमांकन कराया जाए। उन्होंने मांग की है कि अवैध कब्जों को तत्काल हटाकर इन जमीनों को फिर से पशुओं के लिए सुरक्षित किया जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस अनोखे विरोध के बाद भू-माफियाओं के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।





