रिपोर्ट- भूपेंद्र राय
आज पूरे प्रदेश में वट सावित्री व्रत के अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए श्रद्धा और आस्था के साथ व्रत रखा। रायगढ़ में भी इस पर्व को पारंपरिक उल्लास और धार्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया।
सुहागिनों ने पारंपरिक परिधानों में सोलह श्रृंगार कर निर्जला व्रत रखा और दोपहर बाद से ही मंदिरों और पार्कों में स्थित वटवृक्षों के नीचे पूजा-अर्चना के लिए एकत्रित होने लगीं। महिलाओं ने वटवृक्ष के चारों ओर रक्षा सूत्र बांधते हुए विधिपूर्वक परिक्रमा की और अपने पति की दीर्घायु की कामना की।
पूजा के उपरांत सत्यवान-सावित्री की पौराणिक कथा का श्रवण किया गया, जिसमें बताया गया कि किस प्रकार सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और भक्ति से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। कथा सुनते समय कई महिलाओं की आंखें श्रद्धा और भावुकता से नम हो गईं।
रायगढ़ के गांवों से लेकर शहरी इलाकों तक वट सावित्री व्रत का विशेष उत्साह देखने को मिला। यह व्रत नारी शक्ति की आस्था, प्रेम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है और मान्यता है कि यह सौभाग्य की रक्षा तथा संतान प्राप्ति में भी सहायक होता है।





