रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस दिसंबर भारत का दौरा करेंगे। यह यात्रा यूक्रेन युद्ध के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। मॉस्को से की गई आधिकारिक घोषणा के अनुसार, यह दौरा भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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भारत दौरे की प्रमुख बातें
- तारीख: दिसंबर 2025 (तारीखें लगभग तय)
- स्थान: नई दिल्ली
- मुख्य उद्देश्य: द्विपक्षीय सुरक्षा, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग पर वार्ता
- संदर्भ: यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन की पहली विदेश यात्रा
पीएम मोदी से चीन में भी होगी मुलाकात
सूत्रों के अनुसार, पुतिन SCO समिट के दौरान सोमवार को चीन में पीएम मोदी से भी मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात में उनकी भारत यात्रा की तैयारियों पर चर्चा होने की संभावना है।
अमेरिका का दबाव और रूस-भारत संबंध
- अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया है।
- कुल 50% टैरिफ भारत के निर्यात पर लागू हैं।
- इसका उद्देश्य रूस को यूक्रेन युद्ध जारी रखने में आर्थिक दबाव डालना है।
- भारत-रूस साझेदारी में मजबूती का संकेत, खासकर ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में।
पिछली भारत यात्रा: दिसंबर 2021
पुतिन ने आखिरी बार 06 दिसंबर 2021 को भारत का दौरा किया था।
- यात्रा केवल 4 घंटे की थी।
- उस दौरान भारत और रूस के बीच 28 समझौते हुए थे, जिनमें मिलिट्री और तकनीकी क्षेत्र शामिल थे।
- दोनों देशों ने 2025 तक 30 अरब डॉलर का सालाना व्यापार लक्ष्य रखा था।
- अब 2025-2030 के लिए नए आर्थिक रोडमैप पर काम होने की उम्मीद।
भारत और रूस का व्यापार लक्ष्य
- वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार: लगभग 60 अरब डॉलर
- नई योजना: सालाना 100 अरब डॉलर से अधिक व्यापार बढ़ाना
- रणनीतिक साझेदारी को दोनों देश विशेष महत्व देते हैं
पीएम मोदी और रूस
- पीएम मोदी ने 2024 में दो बार रूस यात्रा की थी।
- जुलाई 2024: दो दिन का दौरा
- अक्टूबर 2024: BRICS समिट के लिए
- जुलाई 2024 में मॉस्को में पीएम मोदी को रूस का सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ दिया गया।
पुतिन की अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध
- मार्च 2023 में ICC ने पुतिन के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया।
- आरोप: यूक्रेन में बच्चों के अपहरण और डिपोर्टेशन
- इसके बाद पुतिन ने दूसरे देशों की यात्रा सीमित कर दी थी।
- G20 और अन्य अंतरराष्ट्रीय समिट में उनकी जगह विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हिस्सा लिया।
पुतिन की यह भारत यात्रा दोनों देशों के लिए नई रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का अवसर है। ऊर्जा, सुरक्षा और व्यापार सहयोग के नए समझौतों से भारत-रूस संबंधों में नई ऊंचाइयां देखने को मिल सकती हैं।