भारत में OTT (ओवर-द-टॉप) प्लेटफॉर्म्स का तेजी से विस्तार हुआ है, जिसने मनोरंजन के तरीके को बदल दिया है। हालांकि, हाल ही में Ullu App के रियलिटी शो हाउस अरेस्ट में दिखाए गए अश्लील दृश्यों ने भारत में OTT कंटेंट रेगुलेशन पर बहस को फिर से शुरू कर दिया है। राजनेताओं, सोशल मीडिया यूजर्स और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है। अब सवाल यह है कि क्रिएटिव फ्रीडम और नैतिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए?
हाउस अरेस्ट विवाद: क्या हुआ था?
बिग बॉस फेम अजाज खान द्वारा होस्ट किए गए शो हाउस अरेस्ट के एक एपिसोड में प्रतियोगियों से सेक्स पोजिशन्स का अभिनय करवाया गया, जिसने लोगों में गुस्सा पैदा कर दिया। यह क्लिप वायरल हो गई और इसकी अश्लीलता के लिए आलोचना हुई।
शो से जुड़े विवादित पल
- अजाज खान ने एक महिला प्रतियोगी से सेक्स पोजिशन्स के बारे में सवाल किया, जिससे एक अजीब स्थिति पैदा हो गई।
- प्रतियोगियों को अश्लील मुद्राएं बनाने के लिए कहा गया, जिसे दर्शकों ने “असभ्य” और “बेहूदा” बताया।
- सोशल मीडिया यूजर्स और राजनेताओं ने शो के खिलाफ कार्रवाई और भारत में OTT कंटेंट रेगुलेशन को सख्त करने की मांग की।
राजनीतिक और जनता की प्रतिक्रिया
शिव सेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मुद्दे को संसदीय स्थायी समिति के सामने उठाया और Ullu, Alt Balaji जैसे ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। वहीं, BJP युवा मोर्चा के नेताओं ने सरकार से “बच्चों को ऐसे कंटेंट से बचाने” की अपील की।
OTT रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
यह विवाद उस समय सामने आया है जब भारत के सुप्रीम कोर्ट ने OTT प्लेटफॉर्म्स पर “अश्लीलता की सीमा” को लेकर चिंता जताई थी। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सामाजिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए और निम्नलिखित को नोटिस जारी किया:
- OTT प्लेटफॉर्म्स (Netflix, Amazon Prime, Ullu, AltBalaji)
- सोशल मीडिया कंपनियां (X Corp, Google, Meta, Apple)
यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
- सेंसरशिप की कमी: ट्रैडिशनल मीडिया के विपरीत, OTT प्लेटफॉर्म्स पर बहुत कम प्रतिबंध होते हैं।
- बढ़ती शिकायतें: सख्त कंटेंट गाइडलाइंस की मांग लगातार बढ़ रही है।
- ग्लोबल तुलना: UK और सिंगापुर जैसे देश OTT कंटेंट को सख्ती से रेगुलेट करते हैं।

जनता के गुस्से में दोहरा रवैया
जबकि हाउस अरेस्ट को भारी आलोचना झेलनी पड़ी, कुछ लोगों ने चुनिंदा आक्रोश पर सवाल उठाया। कॉमेडियन समय रैना को भी हाल ही में इसी तरह की आलोचना का सामना करना पड़ा, लेकिन प्रतिक्रिया कम थी।
इस अंतर का कारण क्या है?
- सेलिब्रिटी प्रभाव: बिग बॉस जैसे शो के प्रतिभागियों को अधिक स्क्रूटिनी का सामना करना पड़ता है।
- प्लेटफॉर्म की छवि: Ullu को अक्सर एडल्ट कंटेंट से जोड़कर देखा जाता है।
- राजनीतिक समय: यह विवाद केंद्र सरकार द्वारा “अश्लील कंटेंट” की चेतावनी के बाद आया।
भारत में OTT प्लेटफॉर्म्स का वर्तमान रेगुलेशन
भारत में OTT कंटेंट के लिए कोई एकीकृत रेगुलेटरी बॉडी नहीं है। इसके बजाय, प्लेटफॉर्म्स स्व-नियमन (Self-Regulation) के तहत सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) की गाइडलाइंस का पालन करते हैं।
OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए मौजूदा नियम
| नियम का पहलू | वर्तमान नियम |
|---|---|
| कंटेंट रेटिंग | प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट को U, A, 18+ आदि में वर्गीकृत करना होता है। |
| शिकायत निवारण | दर्शकों के लिए शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था अनिवार्य है। |
| स्व-नियामक संस्था | कुछ प्लेटफॉर्म डिजिटल पब्लिशर्स कंटेंट ग्रीवेंस काउंसिल (DPCGC) का पालन करते हैं। |
हालांकि, आलोचकों का मानना है कि स्व-नियमन प्रभावी नहीं है, इसलिए सरकारी हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।
जनता की राय: क्या OTT कंटेंट पर सेंसरशिप होनी चाहिए?
इस बहस में लोग दो खेमों में बंटे हुए हैं:
- रेगुलेशन के पक्ष में: मानते हैं कि अश्लील कंटेंट समाज की नैतिकता को नुकसान पहुंचाता है, खासकर युवाओं के लिए।
- सेंसरशिप के खिलाफ: तर्क देते हैं कि पैरेंटल कंट्रोल और कंटेंट चेतावनी पर्याप्त हैं, और सेंसरशिप रचनात्मकता को दबाती है।
OTT रेगुलेशन से जुड़े FAQs
Q: क्या भारत सरकार हाउस अरेस्ट जैसे शो पर प्रतिबंध लगा सकती है?
A: हां, आईटी एक्ट की धारा 67A के तहत सरकार अश्लील कंटेंट पर कार्रवाई कर सकती है।
Q: भारत में OTT के लिए सेंसर बोर्ड क्यों नहीं है?
A: OTT प्लेटफॉर्म्स को शुरू में प्रीमियम, वयस्क-उन्मुख सेवाएं माना जाता था, लेकिन अब इनकी लोकप्रियता बढ़ने से सख्त नियमों की मांग हो रही है।
Q: अन्य देश OTT कंटेंट को कैसे रेगुलेट करते हैं?
A:
- UK: Ofcom स्ट्रीमिंग सेवाओं को टीवी की तरह रेगुलेट करता है।
- चीन: सख्त सेंसरशिप से राजनीतिक या “अश्लील” कंटेंट पर रोक लगाता है।
- USA: प्लेटफॉर्म्स स्व-नियमन के साथ उम्र-आधारित रेटिंग का पालन करते हैं।
भारत में OTT रेगुलेशन का भविष्य
बढ़ती जांच के साथ, भारत जल्द ही निम्नलिखित लागू कर सकता है:
- OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए एक केंद्रीय नियामक संस्था।
- नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त जुर्माना।
- विवादास्पद कंटेंट की प्री-स्क्रीनिंग अनिवार्य।
मुख्य बिंदु
- हाउस अरेस्ट विवाद ने भारत में OTT कंटेंट रेगुलेशन की आवश्यकता को उजागर किया है।
- सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप सख्त निगरानी की दिशा में एक कदम है।
- जनता और राजनीतिक दबाव भविष्य की नीतियों को आकार देंगे।
निष्कर्ष
भारत में OTT कंटेंट रेगुलेशन पर बहस अभी खत्म नहीं हुई है। हालांकि रचनात्मक स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन नैतिक सीमाओं और सामाजिक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जैसे-जैसे सरकार, न्यायपालिका और जनता इस मुद्दे पर अपनी राय दे रहे हैं, भारत के डिजिटल मनोरंजन का भविष्य अनिश्चित है।
आपकी राय क्या है? क्या OTT प्लेटफॉर्म्स पर सख्त नियम होने चाहिए या स्व-नियमन पर्याप्त है? कमेंट में बताएं!





