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संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक और आयकर विधेयक पर विपक्षी हंगामा

Opposition uproar over Waqf (Amendment) Bill and Income Tax Bill in Parliament

आज संसद के दोनों सदनों में वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार करने वाली संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट पेश होते ही विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा और लोकसभा में हंगामा शुरू कर दिया।

वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विपक्षी सांसदों के आरोप

लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार करने वाली जेपीसी की रिपोर्ट जगदम्बिका पाल ने पेश की। विपक्षी सांसदों का आरोप था कि इस रिपोर्ट में उनके द्वारा पेश की गई असहमति (डिसेंट नोट) को हटा दिया गया है, जो उनके अनुसार असंवैधानिक है। तिरुचि शिवा ने कहा कि कमेटी के सदस्य जब असहमत होते हैं तो उन्हें डिसेंट नोट के साथ रिपोर्ट का हिस्सा बनाना जरूरी होता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का जवाब

विपक्ष के इन आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई है और न ही किसी चीज को हटाया गया है। उन्होंने विपक्ष को आरोप लगाने के लिए फटकार लगाते हुए कहा कि विपक्ष सदन को गुमराह कर रहा है। रिजिजू ने यह भी स्पष्ट किया कि रिपोर्ट को नियमों के मुताबिक तैयार किया गया है और विपक्ष के सभी आरोप झूठे हैं।

आयकर विधेयक 2025 पेश

इसके साथ ही, लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विधेयक 2025 (न्यू इनकम टैक्स बिल) पेश किया। विपक्षी हंगामे के बीच यह विधेयक सेलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया। इस विधेयक का उद्देश्य आयकर प्रावधानों को सरल और स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत करना है। विधेयक में ‘आकलन वर्ष’ जैसी जटिल शब्दावली की जगह अब ‘कर वर्ष’ की संकल्पना रखी गई है, जिससे आम नागरिकों को आयकर प्रणाली समझने में आसानी हो सके।

जेपी नड्डा का बयान

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने विपक्षी सांसदों पर आरोप लगाया कि वे तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं और जेपीसी की रिपोर्ट पर चर्चा से बचना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस रिपोर्ट पर चर्चा करने से डर है और वे केवल राजनीति कर रहे हैं।

निष्कर्ष

वक्फ (संशोधन) विधेयक और आयकर विधेयक पर संसद में हो रहे हंगामे के बीच सरकार और विपक्ष के बीच की तकरार और गहरी हो गई है। जबकि सरकार इन विधेयकों को पारित करने के लिए तत्तपर है, विपक्ष के आरोपों से यह साफ है कि दोनों पक्षों में मतभेद गहरे हैं। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर संसद में और चर्चा हो सकती है।

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