Vijay Nandan (वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल एडिटर)
No Confidence Motion : नई दिल्ली, संसद के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। इसी क्रम में विपक्षी दल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के संचालन में स्पीकर निष्पक्षता का पालन नहीं कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष बजट सत्र के दूसरे चरण में औपचारिक रूप से अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे सकता है। संसदीय नियमों के अनुसार, ऐसे प्रस्ताव के लिए पूर्व सूचना अनिवार्य होती है, जिसे ध्यान में रखते हुए विपक्ष समय तय कर रहा है।

No Confidence Motion : राहुल गांधी को बोलने से रोकने पर विवाद
विपक्षी दलों की नाराजगी का प्रमुख कारण कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सदन में बोलने से रोके जाने की घटना बताई जा रही है। धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने चीन से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद सदन में भारी हंगामा हुआ। सरकार ने उनके आरोपों को खारिज किया और बाद में स्पीकर द्वारा उन्हें आगे बोलने की अनुमति नहीं दी गई।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि यह संसदीय परंपराओं के विरुद्ध है और इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े होते हैं, खासकर जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो।
No Confidence Motion : निलंबन और विशेषाधिकार का आरोप
विपक्ष का यह भी आरोप है कि सत्ता पक्ष के सांसदों को बार-बार बोलने का अवसर दिया जाता है, जबकि विपक्षी सदस्यों को अनदेखा किया जाता है। हालिया हंगामे के दौरान आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किए जाने से असंतोष और बढ़ गया है।

No Confidence Motion : प्रधानमंत्री के संबोधन को लेकर बयान बना विवाद की वजह
विवाद उस समय और गहरा गया जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यह कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सदन में आने को लेकर आशंका जताई थी। स्पीकर के अनुसार, उन्हें जानकारी मिली थी कि प्रधानमंत्री की मौजूदगी में कोई अप्रिय घटना हो सकती है, इसलिए उनका संबोधन टाल दिया गया। इस बयान पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया। विपक्षी सांसदों का कहना है कि इस तरह की आशंकाएं सदन की गरिमा और विपक्ष की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

No Confidence Motion : लगातार ठप हो रही कार्यवाही
इन तमाम घटनाओं के चलते लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। विपक्ष का कहना है कि यदि निष्पक्षता बहाल नहीं हुई, तो वे स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने से पीछे नहीं हटेंगे।
इतिहास में कब-कब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव या कोशिश हुई
1969 – डॉ. नीलम संजीव रेड्डी
उस समय लोकसभा स्पीकर थे
विपक्ष उनके खिलाफ पद से हटाने का प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा था
प्रस्ताव आने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया
बाद में वे भारत के राष्ट्रपति बने
यह पहला बड़ा मामला माना जाता है
1970 का दशक, जी.एस. ढिल्लों
कांग्रेस सरकार के दौर में
विपक्ष ने पक्षपात के आरोप लगाए
हटाने की बात उठी, लेकिन
प्रस्ताव आधिकारिक रूप से आगे नहीं बढ़ सका
1989–1991: बलराम जाखड़
वी.पी. सिंह सरकार के समय
विपक्ष ने निष्पक्षता पर सवाल उठाए
लेकिनकोई औपचारिक Removal Motion पारित नहीं हुआ
2018 – सुमित्रा महाजन
विपक्षी दलों (TDP सहित) ने
उनके आचरण को लेकर नोटिस देने की कोशिश की
लेकिन लोकसभा सचिवालय ने इसे स्वीकार नहीं किया
Read More : परीक्षा पे चर्चा में पीएम मोदी का छात्रों को संदेश, बोले–टेक्नोलॉजी के गुलाम न बनें





