BY: Yoganand Shrivastva
बेंगलुरु। कर्नाटक से कांग्रेस विधायक बेलूर गोपालकृष्ण ने एक चौंकाने वाला राजनीतिक बयान देकर नई बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने मौजूदा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को प्रधानमंत्री पद का उपयुक्त उम्मीदवार बताते हुए कहा कि “गडकरी आम लोगों के हित में सोचते हैं और उनके पास देश को आगे ले जाने की स्पष्ट विकास योजना है।”
गोपालकृष्ण, जो कि शिमोगा जिले की सागर विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं, ने यह बयान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उस टिप्पणी के संदर्भ में दिया जिसमें उन्होंने नेताओं के लिए 75 वर्ष की उम्र के बाद पद छोड़ने की बात कही थी।
गडकरी में दिखती है अगली पीढ़ी की नेतृत्व क्षमता: गोपालकृष्ण
कांग्रेस विधायक ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा,
“यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 वर्ष की उम्र में पद छोड़ते हैं, तो गडकरी उनके सबसे उपयुक्त उत्तराधिकारी हो सकते हैं। उन्होंने जिस तरह से परिवहन मंत्री रहते हुए देशभर में हाईवे निर्माण और अधोसंरचना क्षेत्र में काम किया है, वह जनता के सामने है।”
गौरतलब है कि नितिन गडकरी इस वर्ष 27 मई को 68 वर्ष के हो चुके हैं, यानी उनके पास प्रधानमंत्री के तौर पर करीब 7 साल तक कार्यकाल निभाने की संभावना है, अगर उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है।
गडकरी की जनकल्याणकारी सोच की तारीफ
विधायक गोपालकृष्ण ने नितिन गडकरी के एक कथित बयान का हवाला देते हुए कहा कि,
“गडकरी ने हाल ही में चिंता जताई थी कि देश में अमीर और अमीर होते जा रहे हैं, जबकि गरीबों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। एक ऐसा नेता जो देश की आर्थिक असमानता को समझता है और समाधान की सोच रखता है, उसे जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।”
मोहन भागवत की टिप्पणी बनी चर्चा का केंद्र
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में नागपुर में एक कार्यक्रम में कहा था कि संघ विचारक मोरोपंत पिंगले ने 75 की उम्र पार करने के बाद अपने पद से खुद हटने का निर्णय लिया था। यही संदर्भ लेकर गोपालकृष्ण ने कहा कि
“अगर भागवत जी 75 वर्ष को सीमा मानते हैं, तो इस विचार को भाजपा और केंद्र सरकार में भी लागू किया जाना चाहिए। ऐसे में गडकरी एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आते हैं।”
येदियुरप्पा का उदाहरण देते हुए भाजपा पर निशाना
गोपालकृष्ण ने वरिष्ठ भाजपा नेता बी.एस. येदियुरप्पा का भी जिक्र किया, जिन्हें 75 साल पूरे होने पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था।
“येदियुरप्पा जी को जबरन इस्तीफा देना पड़ा, जबकि उन्होंने पार्टी को खड़ा किया और सत्ता में पहुंचाया। अब वही नियम मोदी जी पर क्यों नहीं लागू होते?” — यह सवाल पूछते हुए उन्होंने भाजपा की नीति पर सवाल खड़े किए।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
गोपालकृष्ण का यह बयान ऐसे समय आया है जब अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में एक विपक्षी दल के नेता द्वारा भाजपा के कद्दावर मंत्री के लिए प्रधानमंत्री पद की वकालत करना निश्चित रूप से राजनीतिक हलचलों और चर्चाओं को हवा देने वाला कदम माना जा रहा है।
क्या यह विपक्ष की ‘सॉफ़्ट-स्पॉट पॉलिटिक्स’ है?
विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस विधायक का यह बयान भाजपा में संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर विपक्षी दलों की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जहां वे मोदी सरकार के अंदरूनी अंतर्विरोधों को उजागर करने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या गडकरी बन सकते हैं ‘कंसेंसस कैंडिडेट’?
नितिन गडकरी की छवि एक कामकाजी, साफ-सुथरे और विकासपरक नेता की रही है, जो पार्टी लाइन से ऊपर उठकर बात करने की हिम्मत रखते हैं। कांग्रेस विधायक की यह टिप्पणी सिर्फ एक राय नहीं, बल्कि आने वाले समय में केंद्र की राजनीति में संभावित बदलाव की एक सांकेतिक दस्तक भी हो सकती है।





